अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,22सितंबर2026
बलरामपुर जिले में जल संरक्षण के लिए कराए गए एक निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। शंकरगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सिलफिली में,करीब 20 लाख रुपये की लागत से बनाया गया चेकडैम महज छह महीने के भीतर क्षतिग्रस्त होकर टूट गया। चेकडैम का बड़ा हिस्सा टूटकर छह अलग-अलग टुकड़ों में बिखरा हुआ नजर आ रहा हैं। इतनी कम अवधि में निर्माण के धराशायी होने से ग्रामीणों में नाराजगी हैं,और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की हैं।ग्रामीणों के अनुसार, चेकडैम का निर्माण क्षेत्र में जल संरक्षण,भूजल स्तर बढ़ाने और किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कराया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी,कि बारिश के पानी को रोकने से आसपास के खेतों और बस्तियों को इसका लाभ मिलेगा। खासकर गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन चेकडैम के जल्द टूट जाने से इन उम्मीदों को झटका लगा हैं।
🟠छह महीने में ही टूटकर छह हिस्सों में बिखरा
स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि चेकडैम निर्माण को अभी ज्यादा समय भी नहीं बीता था,कि इसकी संरचना कमजोर पड़ने लगी। इसके बाद चेकडैम का हिस्सा टूट गया और अब यह छह अलग-अलग टुकड़ों में बंटा हुआ दिखाई दे रहा हैं।ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया हैं,कि यदि निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का इस्तेमाल किया गया होता तो इतनी कम अवधि में चेकडैम की यह स्थिति नहीं होती। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
🟠ग्रामीणों ने उठाई तकनीकी जांच की मांग
चेकडैम के टूटने के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की हैं। ग्रामीणों का कहना हैं,कि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, डिजाइन, नींव, निर्माण प्रक्रिया और संबंधित तकनीकी मानकों की जांच की जानी चाहिए।ग्रामीणों ने यह भी मांग की हैं,कि जांच में यदि किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता सामने आती हैं,तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी राशि के नुकसान का आकलन कर दोषी पाए जाने वालों से नियमानुसार रिकवरी की जाए।
🟠बाइट-01: किस्मत राम, ग्रामीण
“करीब 20 लाख रुपये की लागत से यह चेकडैम बनाया गया था। हमें उम्मीद थी,कि इससे बारिश का पानी रुकेगा और किसानों को सिंचाई के लिए फायदा मिलेगा। लेकिन निर्माण के कुछ ही महीने बाद चेकडैम टूट गया। अब यह कई हिस्सों में बिखरा पड़ा हैं। इसकी जांच होनी चाहिए और जो भी जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
🟠बाइट-02: सुमर मरावी, ग्रामीण
“चेकडैम को बने अभी छह महीने भी ठीक से नहीं हुए और यह टूटकर बिखर गया। अगर निर्माण सही तरीके से और गुणवत्ता के साथ हुआ होता तो इतनी जल्दी इसकी यह हालत नहीं होती। हम प्रशासन से मांग करते हैं,कि पूरे काम की तकनीकी जांच कराई जाए और सरकारी पैसे की बर्बादी के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।”
🟠जल संरक्षण की योजना पर भी असर
करीब 20 लाख रुपये की लागत से तैयार चेकडैम का उद्देश्य सिर्फ एक निर्माण कार्य पूरा करना नहीं था,बल्कि क्षेत्र में पानी का संरक्षण कर ग्रामीणों और किसानों को दीर्घकालीन लाभ पहुंचाना था। चेकडैम के टूटने से जल संरक्षण की योजना का उद्देश्य भी प्रभावित हुआ हैं।ग्रामीणों का कहना हैं,कि क्षेत्र में पहले से ही गर्मी के दिनों में पानी की समस्या रहती हैं। ऐसे में जल संरक्षण से जुड़े निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी हैं। उनका कहना हैं,कि सरकारी योजनाओं के तहत होने वाले निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी होनी चाहिए, ताकि लाखों रुपये खर्च करने के बाद कुछ ही महीनों में संरचनाएं खराब न हों।
🟠जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक वजह
चेकडैम के टूटने की वास्तविक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं। ग्रामीण जहां निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर सवाल उठा रहे हैं,वहीं इसकी वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता हैं,और क्या चेकडैम के निर्माण की तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जाती हैं। ग्रामीणों ने जल्द जांच और कार्रवाई की मांग की हैं,ताकि जल संरक्षण से जुड़े ऐसे कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके और सरकारी राशि का सही उपयोग हो।












