संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,23सितंबर2026
छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास को नई दिशा देने वाली, महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में प्रस्तावित श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को,केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (CSMC) से मंजूरी मिल गई हैं। करीब 73.42 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत विकसित किया जाएगा।परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा। इसके लिए 18 महीने की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई हैं। परियोजना की डीपीआर और कार्य-सीमा तैयार होने के बाद स्वीकृति मिलते ही निविदा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी हैं।
🟠राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति को चंपारण्य के पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा,कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।मंत्री के अनुसार, चंपारण्य महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली होने के कारण छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। परियोजना के माध्यम से यहां की धार्मिक गरिमा और स्वरूप को बनाए रखते हुए,श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक एवं बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी।छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा,कि बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रहा हैं। उनके अनुसार चंपारण्य परियोजना प्रदेश के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।
🟠15 एकड़ में विकसित होगा आधुनिक पर्यटन परिसर
लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाले श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित सुविधाओं में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सेंटर, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स शामिल हैं।इसके अलावा यज्ञ कुंड और जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
🟠धार्मिक पर्यटन के साथ शिक्षा और वेलनेस को भी मिलेगा बढ़ावा
परियोजना की परिकल्पना केवल तीर्थयात्रा तक सीमित नहीं रखी गई हैं। इसका उद्देश्य चंपारण्य को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत और अनुभव आधारित पर्यटन के समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना हैं।परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी के जीवन,दर्शन और विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। परिवारों के साथ आने वाले पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी यहां सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
🟠बढ़ेगा पर्यटकों का ठहराव, रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद
परियोजना के तहत पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने और उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया हैं। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास के साथ धार्मिक आयोजनों और वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक समय तक ठहरने की संभावनाओं को ध्यान में रखकर सुविधाएं विकसित की जाएंगी।परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को विस्तार मिलने की उम्मीद हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, छोटे व्यवसाय और अन्य आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं।परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।












