अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,7अक्टूबर2026
जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील और पटवारी कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने की, परेशानी अब तकनीक आधारित व्यवस्था से कम होने लगी हैं। बलरामपुर निवासी गौतम सिंह के लिए पंजीयन विभाग की ऑटो म्यूटेशन सुविधा इसी बदलाव का उदाहरण बनी। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ने से उन्हें इसके लिए,अलग से तहसील और पटवारी कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ी।गौतम सिंह ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद के दौरान अपना अनुभव साझा किया। उनके अनुसार इस व्यवस्था से न केवल उनका समय बचा, बल्कि आने-जाने और अन्य खर्चों को मिलाकर उन्हें करीब 10 हजार रुपये की बचत का अनुभव हुआ।
🟠रजिस्ट्री के साथ आगे बढ़ी नामांतरण की प्रक्रिया
गौतम सिंह ने बताया,कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से प्रक्रिया पूरी कराने तहसील और पटवारी कार्यालय जाना पड़ता था। बार-बार कार्यालय जाने के कारण समय के साथ अतिरिक्त खर्च भी होता था।ऑटो म्यूटेशन की सुविधा ने इस प्रक्रिया को उनके लिए काफी आसान बनाया। उन्होंने कहा, “पहले पंजीयन के बाद तहसील और पटवारी के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सीधे रजिस्ट्री कार्यालय से ऑटो म्यूटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ जाती हैं। इससे समय एवं धन दोनों की बचत हुई हैं।”उनके मुताबिक कार्यालयों की दौड़भाग कम होने से उन्हें करीब 10 हजार रुपये की बचत का अनुभव हुआ। इससे रजिस्ट्री के बाद नामांतरण को लेकर होने वाली चिंता भी कम हुई।
🟠तकनीक से पारदर्शी हो रही पंजीयन व्यवस्था
राज्य में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुविधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा हैं। रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया को जोड़ना, आधार आधारित ई-केवाईसी से पहचान सत्यापन और व्हाट्सऐप के माध्यम से पंजीयन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों की अनावश्यक दौड़भाग कम करना हैं।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए जा रहे इन तकनीकी सुधारों के माध्यम से पंजीयन प्रक्रिया को, अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा हैं।
🟠आधार आधारित ई-केवाईसी से पहचान सत्यापन
पंजीयन प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल केवल नामांतरण तक सीमित नहीं हैं। आधार आधारित ई-केवाईसी के माध्यम से पक्षकारों की पहचान का डिजिटल सत्यापन किया जा रहा हैं। इससे पंजीयन प्रक्रिया में पहचान संबंधी जांच को अधिक व्यवस्थित बनाने और गलत पहचान के आधार पर होने वाली गड़बड़ियों की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती हैं।गौतम सिंह ने भी तकनीक आधारित इन सुविधाओं को सुविधाजनक बताया। उनके अनुसार डिजिटल पहचान सत्यापन से पंजीयन प्रक्रिया को लेकर भरोसा बढ़ा हैं,और काम पहले की तुलना में सहज महसूस होता हैं।
🟠व्हाट्सऐप पर मिल रही पंजीयन से जुड़ी जानकारी
नागरिकों की सुविधा के लिए पंजीयन प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न जानकारियां व्हाट्सऐप के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। पंजीयन के विभिन्न चरणों, अपॉइंटमेंट और पंजीकृत दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से मिलने से सामान्य जानकारी के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती हैं।इस तरह पंजीयन से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा हैं।
🟠‘सेवा संकल्प अभियान’ में सामने आया बदलाव का जमीनी अनुभव
गौतम सिंह की कहानी तकनीक आधारित पंजीयन व्यवस्था के जमीनी अनुभव को सामने लाती हैं। उनके लिए ऑटो म्यूटेशन केवल एक डिजिटल सुविधा नहीं रहा, बल्कि रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए होने वाली दौड़भाग कम करने का माध्यम बना।‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर तकनीकी सुधारों के जमीनी प्रभाव, उनके अनुभव और सुझावों को संकलित कर रहा हैं। गौतम सिंह का अनुभव इसी बदलाव की तस्वीर पेश करता हैं,जहां तकनीक के जरिए संपत्ति पंजीयन से लेकर नामांतरण तक की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाने का प्रयास किया जा रहा हैं।












