छत्तीसगढ़ में सड़कों और सरकारी भवनों का बदलेगा स्वरूप,CM विष्णुदेव साय ने बनाया विकास का रोडमैप, 4-लेन सड़कों पर होगा फोकस

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,14अक्टूबर2026

छत्तीसगढ़ में सड़क, सरकारी भवन और अन्य सार्वजनिक अधोसंरचनाओं के विकास को लेकर राज्य सरकार ने, दीर्घकालिक योजना पर जोर दिया हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया हैं,कि प्रदेश में अधोसंरचना का निर्माण केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आने वाले दशकों की आवश्यकताओं,बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार और आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। इसके लिए प्रदेश में दो लेन और चार लेन सड़कों की जरूरत का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सड़क नेटवर्क का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।मुख्यमंत्री साय ने मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए,कि योजनाबद्ध पूंजीगत निवेश के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिले और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता, नियमित रखरखाव और आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।🟠विकास परियोजनाओं से आम जनता को मिले अधिकतम लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा,कि अधोसंरचना पर किया जाने वाला खर्च केवल निर्माण कार्य नहीं,बल्कि प्रदेश के भविष्य में किया गया निवेश हैं। इसलिए किसी भी परियोजना को प्राथमिकता देते समय यह आकलन किया जाना चाहिए कि उससे आवागमन, कृषि, उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए,कि सीमित वित्तीय संसाधनों का उपयोग ऐसी परियोजनाओं में प्राथमिकता से किया जाए,जिनसे अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ मिले और संबंधित क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुलें। परियोजनाओं का चयन केवल तत्काल जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

🟠बजट से निर्माण पूरा होने तक तय होगी समय-सीमा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा,कि बजट में राशि स्वीकृत होना ही पर्याप्त नहीं हैं। किसी भी परियोजना का वास्तविक लाभ तभी मिलता हैं,जब उसका निर्माण निर्धारित समय में पूरा हो और नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध हों।उन्होंने परियोजना की योजना बनाने, बजट प्रावधान, प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश और निर्माण पूरा होने तक प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों से कहा गया,कि परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और अनावश्यक देरी के कारणों को समय रहते दूर किया जाए।मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया,कि काम समय पर पूरा करने के साथ निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। गुणवत्ता के मामले में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

🟠दो लेन और चार लेन सड़कों के लिए बनेगा मास्टर प्लान

प्रदेश के सड़क नेटवर्क को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में यातायात की मौजूदा स्थिति, बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और भविष्य में बढ़ने वाले यातायात दबाव का आकलन किया जाए।इसी आधार पर सर्वे कर यह निर्धारित किया जाएगा कि किन मार्गों को दो लेन से विकसित करने की आवश्यकता हैं,और किन सड़कों को चार लेन बनाया जाना जरूरी हैं। इसके बाद प्रदेश की दीर्घकालिक जरूरतों के अनुसार सड़क नेटवर्क का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से गांवों और शहरों के बीच आवागमन आसान होता हैं। इससे कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने, उद्योगों को परिवहन सुविधा देने और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलती हैं। इसलिए सड़क निर्माण को केवल परिवहन सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए।

🟠सड़कों और सरकारी परिसंपत्तियों के रखरखाव पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क,भवन और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण जितना महत्वपूर्ण हैं,उनका नियमित रखरखाव भी उतना ही जरूरी हैं। समय पर निरीक्षण और मरम्मत नहीं होने से छोटी समस्याएं बड़ी हो सकती हैं, जिससे भविष्य में अधिक खर्च करना पड़ता हैं।उन्होंने निर्देश दिए,कि परियोजनाओं की योजना बनाते समय ही उनके दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नियमित निरीक्षण और समयबद्ध मरम्मत की प्रभावी कार्यप्रणाली विकसित करने से सार्वजनिक परिसंपत्तियों की उपयोगिता और कार्यशील आयु बढ़ाई जा सकेगी।इससे सरकारी संसाधनों की बचत के साथ आम नागरिकों को लंबे समय तक बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

🟠स्कूल-कॉलेज और सरकारी भवनों की डिजाइन में होगा भविष्य का ध्यान

मुख्यमंत्री साय ने विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य सार्वजनिक भवनों के निर्माण में भविष्य की जरूरतों को शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा,कि भवनों की डिजाइन तैयार करते समय केवल वर्तमान उपयोगकर्ताओं की संख्या को ध्यान में रखना पर्याप्त नहीं हैं।आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों और अन्य उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने की संभावना, अतिरिक्त सुविधाओं की जरूरत, सुरक्षा, सुगम पहुंच और रखरखाव जैसे पहलुओं को भी प्रारंभिक योजना में शामिल किया जाना चाहिए। इससे भविष्य में विस्तार के लिए बार-बार अतिरिक्त निर्माण कराने की जरूरत कम हो सकती हैं,और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।

🟠आधुनिक तकनीक और इंजीनियरों के प्रशिक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से देश के अन्य राज्यों में अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में अपनाए जा रहे नवाचारों और सफल तरीकों का अध्ययन करने को कहा।उन्होंने कहा,कि उपयोगी तकनीकों को छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अपनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही इंजीनियरों और तकनीकी अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण तथा कौशल उन्नयन के लिए भी संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाए।मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में टिकाऊपन, सुरक्षा और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

🟠डिजिटल निगरानी से परियोजनाओं की प्रगति पर रहेगी नजर

मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन के तहत योजना निर्माण, वित्तपोषण, स्वीकृति, निविदा एवं ठेका प्रक्रिया, निर्माण, निगरानी और रखरखाव से जुड़ी व्यवस्थाओं में सुधार पर चर्चा हुई। इसके लिए एकीकृत डिजिटल व्यवस्था विकसित करने की योजना पर भी विचार किया गया।इस व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न विभागों की परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति तथा निर्धारित समय-सीमा की निगरानी को बेहतर बनाया जा सकेगा। प्रदेश में उपलब्ध अधोसंरचना का समग्र आकलन कर मौजूदा सुविधाओं और वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर की पहचान करने पर भी जोर दिया गया।मुख्यमंत्री ने कहा, कि विभिन्न विभागों को अलग-अलग काम करने के बजाय साझा विकास दृष्टि के साथ आगे बढ़ना चाहिए। बेहतर समन्वय से अनावश्यक दोहराव रोका जा सकेगा और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग होगा।

🟠‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप विकसित होगा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा,कि राज्य सरकार ‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आधुनिक, मजबूत और टिकाऊ अधोसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।उन्होंने कहा,कि विकास की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि कितने किलोमीटर सड़क बनी या कितने भवन तैयार हुए। असली महत्व इस बात का हैं,कि इन सुविधाओं से नागरिकों का जीवन कितना आसान हुआ, आर्थिक गतिविधियों को कितनी गति मिली और रोजगार एवं निवेश की कितनी संभावनाएं विकसित हुईं।मुख्यमंत्री ने शासन की जनहितकारी योजनाओं और अधोसंरचना विकास से नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत और पी. दयानंद, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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