संदिली सिंह,रायपुर,8अगस्त2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
छत्तीसगढ़ शासन की युक्तियुक्तकरण नीति,अब राज्य के सबसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के नक्सल प्रभावित गांव कमकासुर की वह प्राथमिक शाला, जो बीते एक वर्ष से शिक्षकविहीन थी,अब फिर से बच्चों की किलकारियों और ‘क, ख, ग’ की गूंज से जीवंत हो उठी हैं।
मोहला जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित कमकासुर गांव घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बसा हुआ हैं। यहां लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के कारण,शैक्षणिक ढांचा प्रभावित रहा हैं।गांव की शासकीय प्राथमिक शाला में 14 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन शिक्षक की अनुपस्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से बाधित हो गई थी। इससे न सिर्फ पालकों में चिंता थी, बल्कि बच्चों का मनोबल भी टूटने लगा था।
🟠युक्तियुक्तकरण नीति बनी उम्मीद की किरण:
ग्रामीणों द्वारा लगातार शिक्षक नियुक्ति की मांग के बाद, शासन ने युक्तियुक्तकरण नीति के अंतर्गत, इस विद्यालय में एक प्रधान पाठक की नियुक्ति की हैं। इस पहल से न केवल स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियाँ दोबारा शुरू हुई हैं, बल्कि बच्चों में भी पढ़ाई के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा हैं।
अब विद्यालय में उपस्थिति में बढ़ोतरी हो रही हैं,और अभिभावकों का भरोसा लौटने लगा हैं,कि उनके बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए राज्य सरकार का आभार जताया हैं।
🟠शिक्षा को नया जीवन देने वाली नीति:
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में, प्रदेश सरकार ने शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए शिक्षकों और शालाओं के युक्तियुक्तकरण को प्राथमिकता दी हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना हैं, कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को समुचित और समान शिक्षा का अवसर प्राप्त हो, चाहे वह शहर में हो या सुदूर वनांचल में।
🟠सिर्फ शिक्षक नहीं, सामाजिक समरसता की पहल:
कमकासुर जैसे सुदूर और संवेदनशील क्षेत्र में,शिक्षक की नियुक्ति केवल शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक समरसता और समावेशी विकास की दिशा में भी बड़ा कदम हैं। यह संदेश स्पष्ट हैं, कि छत्तीसगढ़ सरकार अब यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, कि राज्य का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।












