संदिली सिंह,राउरकेला/28अक्टूबर2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
प्रभात की प्रथम किरण जब आकाश को सुनहरे आभा से नहला रही थी, तब घाटों पर उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ सूर्य देव की आराधना में लीन थी। कार्तिक शुक्ल षष्ठी को आज छठ महापर्व का भक्तिमय समापन हुआ — एक ऐसा दृश्य जिसने भक्ति, शुद्धता और अनुशासन की मिसाल पेश की।
राउरकेला ही नहीं, बल्कि ओड़िशा, झारखंड, बिहार और देश-विदेश के विभिन्न कोनों से आए व्रतधारियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं सूर्य देव के चरणों में समर्पित कीं। जल से झिलमिलाते घाटों पर जब अर्घ्य-कमंडल सूर्य की किरणों से आलोकित हुए, तो मानो ऋग्वेद के सूर्य सूक्त जीवंत हो उठे।
🟠भक्ति, तपस्या और त्याग का पर्व
चार दिवसीय इस तपस्वी पर्व के अंतिम दिन व्रतधारी माताओं ने निर्जल उपवास के पश्चात सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। उनके संग परिवारजन और श्रद्धालु भक्तों ने मिलकर आराधना की — ठेकुएं, फलाहार, नारियल, केला और गन्ने के साथ अर्पित किए गए प्रसाद ने वातावरण को पवित्र कर दिया।“जय छठी मइया” और “सूर्य भगवान की जय” के गूंजते जयकारों से पूरा इलाका भक्तिरस से सराबोर हो गया।
🟠आस्था और विज्ञान का संगम
छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सूर्योपासना की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा भी हैं। सुबह-सवेरे सूर्य की किरणें जब शरीर को स्पर्श करती हैं, तो तन में विटामिन D की शक्ति और मन में सकारात्मक ऊर्जा भरती हैं। यही कारण हैं,कि यह पर्व प्रकृति, स्वास्थ्य और अध्यात्म — तीनों का संगम कहलाता हैं।
🟠भव्यता और अनुशासन के साथ सम्पन्न आयोजन
राउरकेला सहित आसपास के जिलों में प्रशासन और स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से छठ पर्व का आयोजन भव्यता और शांति के साथ सम्पन्न हुआ। घाटों की सुरक्षा, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था के उत्कृष्ट प्रबंधन ने श्रद्धालुओं को निर्बाध दर्शन का अवसर दिया।
🟠भक्ति से भीगी आंखें, उम्मीदों से भरे दिल
अर्घ्य के बाद लौटते श्रद्धालु आंखों में आंसू और हृदय में संतोष लिए जपते दिखे —
“जय छठी मइया, जय सूर्य भगवान! जोहर छठी मइया की!”यह पर्व केवल पूजा नहीं,बल्कि परिवारिक एकता, सामाजिक सद्भाव और पर्यावरण चेतना का प्रतीक हैं। अगले कार्तिक में फिर इसी मिलन की प्रतीक्षा में — हर हृदय सूर्य की ज्योति से आलोकित हैं।












