संदिली सिंह,बिलासपुर,छत्तीसगढ़,17जुलाई2026
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के, डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी दक्षता और त्वरित चिकित्सा सेवा का शानदार उदाहरण पेश किया हैं। बैगा जनजाति के 6 वर्षीय मासूम नरेंद्र ने खेल-खेल में, एक सिक्का निगल लिया, जो उसकी अन्ननली (फूड पाइप) में फंस गया। स्थिति इतनी गंभीर थी,कि थोड़ी-सी देरी भी उसकी जान के लिए खतरा बन सकती थी। लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता,आधुनिक तकनीक और टीमवर्क ने असंभव लग रहे ऑपरेशन को सफल बनाकर बच्चे को नया जीवन दे दिया।
🟠खेलते-खेलते हुआ बड़ा हादसा
बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के ग्राम सरगोंड निवासी 6 वर्षीय नरेंद्र,सुबह करीब 7 बजे खेलते समय गलती से एक सिक्का निगल बैठा। इसके बाद उसे खाना-पानी निगलने में तेज परेशानी होने लगी और दर्द बढ़ने लगा।घबराए परिजन उसे पहले पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए, तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया।
🟠एक्स-रे में दिखा अन्ननली में फंसा सिक्का
शाम करीब 6:30 बजे बच्चे को सिम्स लाया गया। यहां रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर सिक्के की सटीक स्थिति का पता लगाया। सिक्का अन्ननली के ऊपरी हिस्से में, श्वासनली के बेहद करीब फंसा हुआ था, जिससे किसी भी समय गंभीर जटिलता उत्पन्न हो सकती थी।
🟠विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मिलकर बचाई मासूम की जान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को, सामान्य एनेस्थीसिया दिया।इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी (Rigid Esophagoscopy) तकनीक के माध्यम से अत्यंत सावधानी के साथ सिक्के को बाहर निकाल लिया।ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और अब बच्चा स्वस्थ हैं। फिलहाल उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया हैं।
🟠टीमवर्क और आधुनिक तकनीक की बड़ी सफलता
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सफल ऑपरेशन पर पूरी मेडिकल टीम की सराहना करते हुए कहा,कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के उत्कृष्ट समन्वय तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण इस जटिल मामले का सुरक्षित उपचार संभव हो पाया।उन्होंने कहा,कि सिम्स का उद्देश्य हर मरीज को समय पर गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हैं।
🟠डॉक्टरों की चेतावनी: छोटी लापरवाही बन सकती हैं,बड़ा खतरा
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा,कि छोटे बच्चों के आसपास सिक्के, बटन, बैटरी, चुंबक और छोटे खिलौने कभी भी खुला न छोड़ें।
🟠यदि बच्चा गलती से कोई वस्तु निगल ले और उसे
खाना निगलने में परेशानी,गले में दर्द,लगातार लार टपकना,या सांस लेने में दिक्कत हो,तो किसी भी घरेलू उपाय पर भरोसा न करें, बल्कि तुरंत विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचें।
🟠समय पर इलाज बना नई जिंदगी की वजह
डॉक्टरों के अनुसार यदि सिक्का अधिक समय तक अन्ननली में फंसा रहता, तो संक्रमण, अन्ननली को नुकसान या सांस की गंभीर समस्या जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती थी। समय पर इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्परता ने एक मासूम की जिंदगी बचा ली।












