संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,20जुलाई2026
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली हैं। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री को ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म’ का सम्मान मिला हैं। इस उपलब्धि पर प्रदेशभर में हर्ष का माहौल हैं। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और लोक परंपराओं के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम को हार्दिक बधाई दी।
🟠रामनामी परंपरा को मिली राष्ट्रीय पहचान
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा,कि यह सम्मान केवल एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म की सफलता नहीं,बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का राष्ट्रीय सम्मान हैं। रामनामी समाज भगवान श्रीराम के प्रति अटूट आस्था, सादगीपूर्ण जीवन शैली और शरीर पर ‘राम’ नाम अंकित कराने की अनूठी परंपरा के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता हैं।उन्होंने कहा,कि डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ ने इस विरासत, भक्ति और सामाजिक समरसता को बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया हैं,जिससे देश-दुनिया का ध्यान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर की ओर आकर्षित हुआ हैं।
🟠संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने विश्वास जताया,कि इस राष्ट्रीय सम्मान से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, जनजातीय विरासत,लोककलाओं और आध्यात्मिक परंपराओं को नई पहचान मिलेगी। साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन को भी नई गति मिलेगी।उन्होंने कहा,कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगी और छत्तीसगढ़ की पहचान राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और मजबूत होगी।
🟠निर्देशक और पूरी टीम को शुभकामनाएं
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम की सराहना करते हुए कहा,कि उनकी यह सफलता छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली प्रेरणादायी उपलब्धि हैं। उन्होंने आशा जताई,कि भविष्य में भी प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं पर आधारित ऐसे उत्कृष्ट रचनात्मक प्रयास निरंतर सामने आते रहेंगे।












