अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,21जुलाई 2026
जिले में बालिकाओं की सुरक्षा और जागरूकता को, लेकर प्रशासन लगातार सक्रिय हैं। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशन में,महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ग्राम सनावल स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों,व्यक्तिगत सुरक्षा और कानून संबंधी जानकारी देकर उन्हें आत्मविश्वासी एवं सजग बनाना था।कार्यक्रम में छात्राओं को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम,चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, गुड टच-बैड टच, बाल अधिकार, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, लैंगिक समानता, नशामुक्ति, बाल विवाह, बाल श्रम, भिक्षावृत्ति तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
🟠’गुड टच-बैड टच’ की समझ से बढ़ेगी सुरक्षा
विशेषज्ञों ने छात्राओं को सरल भाषा में बताया,कि गुड टच और बैड टच की पहचान कैसे करें और किसी भी प्रकार की असहज या संदिग्ध स्थिति में चुप रहने के बजाय तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षकों या विश्वसनीय व्यक्ति को जानकारी दें। साथ ही किसी भी प्रकार के शोषण या खतरे की स्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर तत्काल संपर्क करने की सलाह दी गई।
🟠POCSO एक्ट और बाल अधिकारों की दी गई जानकारी
कार्यक्रम में पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया,कि बच्चों के विरुद्ध किसी भी प्रकार का यौन अपराध कानूनन गंभीर अपराध हैं,और ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा एवं गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता होती हैं। छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के लिए उपलब्ध सरकारी व्यवस्थाओं से भी अवगत कराया गया।
🟠बाल विवाह, बाल श्रम और नशामुक्ति पर भी हुआ संवाद
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह, बाल श्रम, भिक्षावृत्ति और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। छात्राओं से इन कुरीतियों के खिलाफ जागरूक रहने और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की गई।
🟠बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश
कार्यक्रम में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के उद्देश्य बताते हुए बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा,कि शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां ही समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया,कि जिले के विभिन्न विद्यालयों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि प्रत्येक बालिका अपने अधिकारों, सुरक्षा और कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक हो सके।












