बारिश की हर बूंद बचाने में छत्तीसगढ़ देश में नंबर-1, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में हासिल किया पहला स्थान

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,3सितंबर2026

बारिश की हर बूंद को सहेजकर उसे जमीन के भीतर पहुंचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में,छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण (JSJB 3.0) में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया हैं।खास बात यह हैं,कि राज्य के सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में जगह बनाने में सफल रहे हैं।यह उपलब्धि ऐसे समय सामने आई हैं,जब देशभर में वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा हैं।

🟠PM मोदी की मौजूदगी में राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत हुआ छत्तीसगढ़ मॉडल

नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी मौजूदगी में आयोजित इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने,छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की।वहीं सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रदेश में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।🟠सरकार की योजना नहीं, जनभागीदारी बना जल संरक्षण का आधार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा,कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा हैं। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का रूप दिया गया हैं।मुख्यमंत्री ने कहा, कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी की अहमियत को उन्होंने करीब से महसूस किया हैं।उन्होंने कहा,कि किसान के लिए पानी सिर्फ प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय हैं। यही वजह है कि राज्य में जल संरक्षण की रणनीति के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया हैं।

🟠‘5 प्रतिशत मॉडल’ बना जल संरक्षण की नई मिसाल

सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने कोरिया जिले से शुरू हुए, ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया।इस मॉडल के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के लिए उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, जिनसे बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं रोका जा सके और धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचाया जा सके।इस पहल की सबसे खास बात यह हैं,कि किसान इसमें केवल लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि जल संरक्षण के सक्रिय भागीदार बने हैं।पंचायतों और स्थानीय समुदायों के सहयोग के साथ विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।🟠जियो-टैगिंग और मॉनिटरिंग से हो रही निगरानी

जल संरक्षण अभियान में सिर्फ संरचनाओं का निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया हैं।गांवों में जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि मिलकर अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। खेतों में बारिश का पानी रोकने से भू-जल पुनर्भरण बढ़ाने और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर करने की उम्मीद हैं।

🟠JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने मारी बाजी

‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीन चरणों में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा हैं।JSJB 1.0 में प्रदेश में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं और राज्य ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया।इसके बाद JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें 23 लाख 7 हजार 768 संरचनाओं का कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई हैं। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर रहा।अब JSJB 3.0 में प्रदेश ने देश में, पहला स्थान हासिल किया है। इस चरण में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 77 हजार 719 का कार्य पूरा हो चुका हैं।इस तरह अलग-अलग चरणों में राज्य में बड़े पैमाने पर वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित एवं दर्ज की गई हैं।

🟠छत्तीसगढ़ के 5 जिले टॉप-10 में

राज्य के साथ-साथ जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई हैं।सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।इन जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाओं के निर्माण के साथ ग्रामीणों और पंचायतों की भागीदारी को बढ़ावा दिया गया हैं।

🟠26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक

राज्य में जल संरक्षण के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने का दावा किया गया हैं। प्रदेश में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 होने की जानकारी दी गई हैं।इसके साथ ही पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान भी जताया गया हैं।भू-जल स्थिति को बेहतर करने के लिए नए जल संचयन ढांचों के साथ पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और स्थानीय स्तर पर निगरानी पर जोर दिया जा रहा हैं।

🟠‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को छत्तीसगढ़ ने,स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू करने पर जोर दिया हैं।प्रदेश में कोशिश है कि बारिश का ज्यादा से ज्यादा पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर रोका जाए, ताकि उसे भू-जल के रूप में संरक्षित किया जा सके।इससे सिंचाई, पेयजल और स्थानीय जरूरतों के लिए भविष्य में पानी की उपलब्धता बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद हैं।

🟠CM साय ने दिए जल संरक्षण को लेकर कई सुझाव

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच से जल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए।उन्होंने कहा,कि प्रत्येक राज्य को अपनी भौगोलिक स्थिति, वर्षा के स्वरूप, भू-जल स्तर और स्थानीय जरूरतों के अनुसार अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करना चाहिए।उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने का सुझाव दिया।इसके अलावा BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग को मजबूत करने और अभियान की प्रगति की हर तीन महीने में मुख्य सचिव स्तर पर समीक्षा करने का सुझाव भी दिया।मुख्यमंत्री के अनुसार तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी के बीच बेहतर तालमेल बनाकर जल संरक्षण के प्रयासों को और प्रभावी बनाया जा सकता हैं।

🟠जल संरक्षण से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उम्मीद

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी आधारित मॉडल राष्ट्रीय अभियान के लिए उपयोगी उदाहरण बन सकता हैं।बारिश के पानी को खेत और गांव में रोकने से भू-जल पुनर्भरण बेहतर होने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद हैं। इससे किसानों की मानसून पर निर्भरता कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिल सकती हैं।छत्तीसगढ़ की पहल यह संदेश देती है कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसान, पंचायत और समाज की साझा जिम्मेदारी हैं। खेत का एक छोटा हिस्सा पानी के लिए सुरक्षित रखने जैसी पहल भविष्य की जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बन सकती हैं।सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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