अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,2अक्टूबर 2026
देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में 1 जुलाई 2024 से बड़ा बदलाव हुआ हैं। इसी तारीख से भारतीय न्याय संहिता (BNS),भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू हुए। इन कानूनों ने क्रमशः भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्थान लिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार नए कानूनों में नागरिक-केंद्रित व्यवस्था,महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों को प्राथमिकता,तकनीक के इस्तेमाल और फोरेंसिक जांच को मजबूत करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी जागरूकता सामग्री में,आम लोगों को नए कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकारों और महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई हैं।
🟠Zero FIR से बढ़ी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा
नए कानूनों के तहत अपराध की सूचना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी दी जा सकती हैं। Zero FIR की व्यवस्था का उद्देश्य यह हैं,कि पीड़ित को केवल घटनास्थल के थाना क्षेत्र के कारण शिकायत दर्ज कराने में परेशानी न हो। शिकायत बाद में संबंधित थाने को भेजी जा सकती हैं।FIR दर्ज होने के बाद उसकी प्रति प्राप्त करना,मामले की जांच की स्थिति की जानकारी लेना और जरूरत पड़ने पर, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी या न्यायिक अधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत रखना नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण अधिकार हैं।
🟠महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर
नए आपराधिक कानूनों में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों को विशेष प्राथमिकता दी गई हैं। यौन अपराधों के मामलों में पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी हैं। जांच और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में भी पीड़िता की निजता और संवेदनशीलता का ध्यान रखने के प्रावधान हैं।बच्चों के यौन अपराधों से जुड़े मामलों में POCSO Act, 2012 के प्रावधान भी लागू होते हैं। बच्चे की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती और ऐसे मामलों में बाल-अनुकूल प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया हैं।
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🟠छोटे अपराधों में सामुदायिक सेवा का प्रावधान
BNS में पहली बार कुछ छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा (Community Service) को सजा के रूप में शामिल किया गया हैं। इसका उद्देश्य हर मामले में जेल की सजा देने के बजाय कुछ परिस्थितियों में सुधारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना हैं। हालांकि सामुदायिक सेवा कब और किस मामले में दी जाएगी, यह संबंधित कानूनी प्रावधान और अदालत के निर्णय पर निर्भर करता हैं।
🟠जांच में तकनीक और फोरेंसिक की भूमिका बढ़ी
नए कानूनों में आपराधिक जांच में तकनीक के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया हैं। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल सामग्री को साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने की व्यवस्था को मजबूत किया गया हैं। गंभीर अपराधों में फोरेंसिक जांच को बढ़ावा दिया गया हैं,और तलाशी व जब्ती जैसी पुलिस कार्रवाई में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।सरकार ने नए कानूनों के क्रियान्वयन के लिए e-Sakshya, e-Summons और Nyay Shruti जैसे तकनीकी सिस्टम भी विकसित किए हैं।
🟠पीड़ित को जांच की प्रगति की जानकारी
BNSS के तहत पुलिस को जांच की प्रगति के संबंध में सूचनाकर्ता या पीड़ित को जानकारी देने की व्यवस्था हैं। आधिकारिक कानून में पुलिस अधिकारी को जांच की, प्रगति की सूचना 90 दिनों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम सहित निर्धारित तरीके से देने का प्रावधान हैं।
🟠कानूनी मदद चाहिए तो DLSA से संपर्क
यदि किसी नागरिक को वकील करने में आर्थिक परेशानी हैं,तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती हैं। महिलाओं, बच्चों, SC/ST वर्ग, दिव्यांगजनों, हिरासत में रखे गए लोगों और कई अन्य पात्र श्रेणियों को कानूनी सहायता उपलब्ध हैं। NALSA की राष्ट्रीय निःशुल्क कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 हैं।
🔸️जरूरी हेल्पलाइन नंबर
🔸️पुलिस आपातकालीन सहायता: 112
🔸️महिला हेल्पलाइन: 181
🔸️चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
🔸️साइबर अपराध हेल्पलाइन: 1930
🔸️निःशुल्क कानूनी सहायता: 15100
🔸️साइबर अपराध पोर्टल: cybercrime.gov.in
साइबर अपराध की स्थिति में 1930 पर तुरंत शिकायत करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट करने की सुविधा उपलब्ध हैं।












