अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,10अक्टूबर2026
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में आयोजित विराट शिव गुरु महोत्सव में आस्था,आध्यात्मिकता और गुरु भाव का अनूठा संगम देखने को मिला। नगर के बालक हाई स्कूल मैदान में शनिवार, 10 अक्टूबर को शिव शिष्य हरिन्द्रानन्द फाउंडेशन के,तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में 25 हजार से अधिक शिव शिष्यों के शामिल होने का दावा किया गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ झारखंड और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, उनकी पत्नी पुष्पा नेताम, पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह और नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल विशेष रूप से शामिल हुए।महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव के गुरु स्वरूप से प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ना और शिव को गुरु मानने की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनंद ने शिव शिष्य साहब हरिन्द्रानन्द जी के संदेश को साझा करते हुए शिव की शिष्यता के सिद्धांतों और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
🟠मंत्री रामविचार नेताम और पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह की रही उपस्थिति
विराट शिव गुरु महोत्सव में कृषि मंत्री रामविचार नेताम अपनी पत्नी पुष्पा नेताम के साथ शामिल हुए। कार्यक्रम में पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह और नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल की मौजूदगी भी रही। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे शिव शिष्यों ने आयोजन में सहभागिता की।महोत्सव में शिव शिष्य परिवार के जिला अध्यक्ष पंचम कुशवाहा, मनोज यादव सहित बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य उपस्थित रहे। आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली और कार्यक्रम को सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग दिया।
🟠“शिव केवल नाम के नहीं, काम के भी गुरु हैं”: दीदी बरखा आनंद
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनंद ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान शिव केवल नाम के नहीं, बल्कि काम के भी गुरु हैं। उन्होंने शिव शिष्य साहब हरिन्द्रानन्द जी के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा,कि जब भगवान शिव के औढरदानी स्वरूप से धन, धान्य, संतान और संपदा प्राप्त करने की मान्यता हैं,तो उनके गुरु स्वरूप से ज्ञान क्यों नहीं प्राप्त किया जाए?उन्होंने कहा, कि ज्ञान के अभाव में किसी भी संपत्ति या संपदा का उपयोग नुकसानदायक हो सकता हैं। इसलिए जीवन में ज्ञान का विशेष महत्व हैं। भगवान शिव को जगतगुरु बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या लिंग का व्यक्ति उन्हें अपना गुरु मान सकता हैं।दीदी बरखा आनंद के अनुसार, शिव का शिष्य बनने के लिए किसी पारंपरिक औपचारिकता या दीक्षा की अनिवार्यता नहीं हैं। मन में भगवान शिव को अपना गुरु स्वीकार करना ही शिष्यता की शुरुआत हैं। इस भाव को स्थायी रूप से आत्मसात करना और जीवन में गुरु के प्रति श्रद्धा बनाए रखना इस अवधारणा का प्रमुख आधार हैं।
🟠शिव की शिष्यता के बताए तीन सूत्र
दीदी बरखा आनंद ने शिव का शिष्य बनने के तीन सूत्र भी बताए। पहला सूत्र हैं,—मन ही मन भगवान शिव से कहना, “हे शिव, आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिए।”दूसरा सूत्र हैं लोगों को यह सुनाना और समझाना,कि भगवान शिव गुरु हैं, ताकि अन्य लोग भी इस आध्यात्मिक विचार से जुड़ सकें। तीसरा सूत्र हैं मन ही मन अपने गुरु शिव को प्रणाम करना। श्रद्धालु अपनी इच्छानुसार ‘नमः शिवाय’ मंत्र के माध्यम से भी प्रणाम कर सकते हैं।उन्होंने स्पष्ट किया,कि इन तीन सूत्रों के अतिरिक्त किसी प्रकार के अंधविश्वास या आडंबर की आवश्यकता नहीं हैं। उनके संबोधन में शिव की शिष्यता को सरल आध्यात्मिक विचार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें आस्था, गुरु भाव और दूसरों तक संदेश पहुंचाने पर जोर दिया गया।
🟠वर्ष 1974 में शिव को गुरु मानने से शुरू हुई अवधारणा
कार्यक्रम में भैया अर्चित आनंद ने शिव शिष्यता की अवधारणा और उसके विस्तार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा,कि इस विचार का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को भगवान शिव के गुरु स्वरूप से जोड़ना हैं। शिव शिष्यों और शिष्याओं के आयोजनों के माध्यम से यही संदेश दिया जाता हैं,कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति भगवान शिव को अपना गुरु मान सकता हैं।उन्होंने बताया,कि शिव शिष्य साहब श्री हरिन्द्रानन्द जी ने वर्ष 1974 में भगवान शिव को अपना गुरु माना था। इसके बाद 1980 के दशक तक शिव शिष्यता की यह अवधारणा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में फैलने लगी। हरिन्द्रानन्द जी और उनकी धर्मपत्नी दीदी नीलम आनंद जी ने जाति, धर्म, लिंग, वर्ण और संप्रदाय से परे मानव मात्र को भगवान शिव के गुरु स्वरूप से जुड़ने का आह्वान किया।भैया अर्चित आनंद ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में भगवान शिव को आदिगुरु, परमगुरु और जगतगुरु के रूप में प्रतिष्ठित किए जाने का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि शिव गुरु महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से इस विचार को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा हैं।
🟠एक दिन पहले से रामानुजगंज पहुंचने लगे थे शिव शिष्य
विराट शिव गुरु महोत्सव को लेकर रामानुजगंज में पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा झारखंड और उत्तर प्रदेश से शिव शिष्य एक दिन पहले से ही पहुंचने लगे थे। आयोजन स्थल पर सुबह से ही स्वयंसेवक व्यवस्था संभालने में जुट गए थे।आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए लगभग एक हजार महिला स्वयंसेवक पीली साड़ी में और करीब 500 पुरुष स्वयंसेवक काली पैंट तथा सफेद शर्ट में तैनात रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच स्वयंसेवकों ने आयोजन के संचालन में सहयोग किया।
🟠शिव भक्ति और गुरु भाव का संदेश लेकर संपन्न हुआ महोत्सव
रामानुजगंज के बालक हाई स्कूल मैदान में आयोजित विराट शिव गुरु महोत्सव में बड़ी संख्या में शिव शिष्यों की सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भगवान शिव के गुरु स्वरूप, ज्ञान, सेवा और आध्यात्मिक विचारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पुष्पा नेताम, पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह और नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल की उपस्थिति के साथ दीदी बरखा आनंद की शिव चर्चा आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं तक यह संदेश पहुंचाने पर जोर दिया गया कि भगवान शिव को गुरु मानने की अवधारणा आस्था के साथ-साथ सेवा, ज्ञान और मानवीय सद्भाव से भी जुड़ी हैं।












