संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,14अक्टूबर2026
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बुधवार को जांजगीर-चांपा जिले की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी शिवरीनारायण पहुंचे। यहां उन्होंने सपत्नीक भगवान नर-नारायण के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति,सामाजिक सद्भाव और प्रदेश के प्रत्येक परिवार के मंगलमय जीवन के लिए भगवान नर-नारायण से प्रार्थना की।इस दौरान मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय भी उनके साथ मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण के मठ मंदिर और जगन्नाथ मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा, लोकआस्था और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित किया।
🟠शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा,कि शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। यह पावन धरा माता शबरी की अनन्य भक्ति और प्रभु श्रीराम से जुड़ी स्मृतियों को अपने भीतर संजोए हुए हैं। यहां पहुंचकर मन को विशेष शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती हैं।उन्होंने कहा, कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध हैं। इस विरासत को सुरक्षित रखना, धार्मिक स्थलों की पहचान को मजबूत करना और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की साझा जिम्मेदारी हैं।मुख्यमंत्री ने कामना की,कि भगवान नर-नारायण की कृपा से प्रदेश में सुख-शांति बनी रहे और छत्तीसगढ़ विकास, समृद्धि तथा खुशहाली के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे। उन्होंने समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को बनाए रखने की भी प्रार्थना की।
🟠मठ मंदिर में गौ माता को गुड़ और केला खिलाकर किया पूजन
भगवान नर-नारायण के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री साय शिवरीनारायण स्थित मठ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने गौ माता को गुड़ और केला खिलाया तथा माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक पूजन किया।मुख्यमंत्री ने गौ सेवा को सनातन संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा, कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन, कृषि व्यवस्था और लोकपरंपराओं में गौ माता का विशेष स्थान रहा हैं। गौ सेवा भारतीय संस्कृति में सेवा, करुणा और संवेदनशीलता की भावना से जुड़ी हुई हैं।मठ मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री ने संतों और श्रद्धालुओं से भी आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने कहा,कि मठ-मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं हैं, बल्कि ये पीढ़ियों से समाज को संस्कार, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का कार्य करते आए हैं।
🟠जगन्नाथ मंदिर में भी की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ शिवरीनारायण स्थित जगन्नाथ मंदिर में भी दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी और मंगलमय जीवन की कामना की।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण की धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा,कि यह नगरी छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के पावन संगम के निकट स्थित शिवरीनारायण लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा हैं।यहां के मंदिर, धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाती हैं। इन स्थलों का संरक्षण और प्रचार-प्रसार धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं।
🟠माता शबरी की भक्ति और प्रभु श्रीराम की स्मृतियों से जुड़ी पावन धरा
मुख्यमंत्री ने कहा,कि शिवरीनारायण का नाम आते ही माता शबरी की अनन्य भक्ति और प्रभु श्रीराम के प्रति उनके अगाध प्रेम का स्मरण होता हैं। यह पावन भूमि भक्ति, समर्पण और सामाजिक समरसता का संदेश देती हैं।उन्होंने कहा,कि शिवरीनारायण की आध्यात्मिक विरासत छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास और लोकआस्था का महत्वपूर्ण अध्याय हैं। राज्य की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं यहां की पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। इन्हें संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक हैं।मुख्यमंत्री ने धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की पहचान को सुदृढ़ करने तथा प्रदेश की समृद्ध विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
🟠जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति
🔸️मुख्यमंत्री के शिवरीनारायण प्रवास के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री – तोखन साहू,
🔸️वित्त मंत्री – ओ.पी. चौधरी,
🔸️सांसद – कमलेश जांगड़े, राजेश्री महंत रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री के इस धार्मिक प्रवास में भगवान नर-नारायण और भगवान जगन्नाथ के दर्शन,गौ सेवा तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना प्रमुख रूप से शामिल रही। शिवरीनारायण की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया।












