सुपर 30 की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में ‘सरगुजा 30’: आदिवासी अंचल के होनहारों को मिल रही IIT-JEE और NEET की मुफ्त कोचिंग, DEO की अनोखी पहल

अंबिकापुर (सरगुजा) | 03 जून 2026 | न्यूज डेस्क,रायपुर

अंबिकापुर। संसाधनों की कमी और आर्थिक तंगी कभी भी प्रतिभा का रास्ता नहीं रोक सकती, बशर्ते इरादे मजबूत हों और प्रशासन का साथ मिले। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों आदिवासी बाहुल्य सरगुजा जिले में देखने को मिल रहा है। शिक्षा विभाग ने यहां के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए एक शानदार और अनूठी शुरुआत की है। बिहार के विश्वप्रसिद्ध ‘सुपर 30’ मॉडल से प्रेरणा लेते हुए जिले में ‘सरगुजा 30’ नाम से एक विशेष कोचिंग कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
इस मुहिम के तहत ग्रामीण और आदिवासी अंचल के होनहार छात्र-छात्राओं को देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं—IIT-JEE और NEET—की तैयारी बिल्कुल निशुल्क कराई जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. दिनेश कुमार झा की इस दूरगामी सोच के चलते अब सरगुजा के बच्चों को कोटा या बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में लाखों रुपये खर्च किए बिना, अपने ही घर पर विश्वस्तरीय कोचिंग की सुविधा मिल रही है।

गर्मी की छुट्टियों में ‘तप’ रहे छात्र: सुबह 7:30 बजे से सजती है क्लास

अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चे आर्थिक तंगी के कारण कोचिंग की महंगी फीस नहीं भर पाते और उनके डॉक्टर या इंजीनियर बनने के सपने अधूरे रह जाते हैं। इसी खाई को पाटने के लिए ‘सरगुजा 30’ अभियान के तहत इन दिनों भीषण गर्मी की छुट्टियों में भी पढ़ाई का दौर जारी है।
समय: रोजाना सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
कौन ले रहा है हिस्सा: शासकीय और निजी, दोनों ही स्कूलों के कक्षा 10वीं और 12वीं के चुनिंदा छात्र-छात्राएं।

पढ़ाई का तरीका: यहां बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के पैटर्न पर विषयों की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। साथ ही खुद के मूल्यांकन के लिए नियमित टेस्ट सीरीज भी आयोजित की जा रही है।

शिक्षकों की ‘स्वप्रेरणा’ बनी इस अभियान की रीढ़

‘सरगुजा 30’ की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसके लिए किसी बाहरी और खर्चीली फैकल्टी को नहीं बुलाया गया है। स्थानीय शिक्षकों ने खुद आगे आकर, स्वप्रेरणा से इन बच्चों को पढ़ाने की कमान संभाली है। बिना किसी अतिरिक्त लाभ के, अपनी छुट्टियों को त्यागकर शिक्षक हर दिन बच्चों के कॉन्सेप्ट क्लियर करने में जुटे हैं।
“सरगुजा के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी थी तो बस सही मार्गदर्शन की। ‘सरगुजा 30’ के जरिए हम ग्रामीण अंचल के अंतिम छोर पर बैठे बच्चे को भी वह अवसर देना चाहते हैं, जो बड़े शहरों के अमीर परिवारों के बच्चों को मिलता है। शिक्षकों का सेवाभाव इस अभियान को सफल बना रहा है।”
— डॉ. दिनेश कुमार झा, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), सरगुजा

बेटियों की आंखों में दिखे बड़े सपने

इस विशेष कोचिंग में बड़ी संख्या में छात्राएं भी शामिल हो रही हैं, जिनके हौसले सातवें आसमान पर हैं। कोचिंग ले रहीं स्थानीय छात्राओं का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि सरगुजा में उन्हें IIT और NEET जैसी परीक्षाओं के लिए इस स्तर की गाइडेंस मिलेगी।

Nexis News Take

शिक्षा के क्षेत्र में ‘सरगुजा 30’ जैसी पहल मील का पत्थर साबित होंगी। यह मॉडल न केवल बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधारेगा, बल्कि आने वाले समय में देश के सबसे कठिन कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के रिजल्ट में सरगुजा का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराएगा। प्रशासन की यह पहल वाकई तारीफ के काबिल है।

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