खेत बचाओ अभियान : गांव-गांव पहुंच रहे कृषि अधिकारी, किसानों को दे रहे वैज्ञानिक और लाभकारी खेती की जानकारी

संदिली सिंह,बिलाईगढ़,छत्तीसगढ़,5जून2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा जिलेभर में “खेत बचाओ अभियान” चलाया जा रहा हैं। छत्तीसगढ़ कृषि मंत्रालय एवं उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव के निर्देश पर 1 जून से 30 जून तक संचालित इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर किसानों को आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल खेती की तकनीकी जानकारी दे रहे हैं।

🟠कृषि चौपालों में किसानों को दी जा रही उपयोगी जानकारी

अभियान के तहत विकासखंड बिलाईगढ़ के सोनियाडीह, धनसीर, बेगपाली, बिसनपुर, अर्जुनी और पेंड्रावन गांवों में कृषि चौपाल का आयोजन किया गया। चौपाल में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कृष्ण कुमार साहू ने किसानों से संवाद करते हुए,विभिन्न कृषि योजनाओं और नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी साझा की।उन्होंने किसानों को खेत बचाओ अभियान, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना तथा धान उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाई जाने वाली उन्नत कृषि पद्धतियों के बारे में विस्तार से बताया।

🟠प्राकृतिक खेती और जैविक उपायों पर विशेष जोर

ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर प्रकाश कुमार थवाईत ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गोबर खाद, बीजामृत, जीवामृत, हरी खाद, ढैंचा तथा जैविक कल्चर के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के प्रभावी उपाय बताए।उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक साबित हो सकती हैं।

🟠मृदा स्वास्थ्य और फसल प्रबंधन पर मिला मार्गदर्शन

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी दीनानाथ साहू ने किसानों को फसल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान हरी खाद ढैंचा के महत्व पर विशेष चर्चा की गई और किसानों को ढैंचा बीज का वितरण भी किया गया।

🟠किसानों ने दिखाई उत्साहपूर्ण भागीदारी

कार्यक्रम में किसान मित्र रमेश लाल पटेल सहित क्षेत्र के अनेक कृषक मौजूद रहे। किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई।कृषि विभाग का यह अभियान किसानों को टिकाऊ खेती, बेहतर उत्पादन और कम लागत वाली कृषि पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा हैं।

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