संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,30सितंबर2026
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और सदियों पुरानी लोक परंपराओं के लिए बड़ी खबर हैं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु इस वर्ष बस्तर दशहरा के महत्वपूर्ण आयोजन मुरिया दरबार में शामिल होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति ने,23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया हैं।राष्ट्रपति की प्रस्तावित मौजूदगी को बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सामुदायिक जीवन की देशभर में पहचान से जोड़कर देखा जा रहा हैं।
🟠मुख्यमंत्री के निमंत्रण पर राष्ट्रपति ने दी सहमति
राष्ट्रपति को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओर से निमंत्रण दिए जाने के अवसर पर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर लोकसभा सांसद महेश कश्यप और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन मौजूद रहे।अब 23 अक्टूबर को जगदलपुर में होने वाले मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की उपस्थिति प्रस्तावित हैं। यह आयोजन बस्तर दशहरा की परंपराओं में विशेष स्थान रखता हैं।
🟠क्या हैं,मुरिया दरबार
मुरिया दरबार को बस्तर की पारंपरिक सामाजिक और सामुदायिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति माना जाता हैं। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर के सामाजिक जीवन, परंपरागत व्यवस्था और समुदाय के बीच संवाद की परंपरा से जुड़ा आयोजन हैं।इसमें पारंपरिक सामाजिक नेतृत्व, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा दिखाई देती हैं। बस्तर के सामाजिक जीवन में मांझी और चालकी जैसे पारंपरिक पदों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं।राष्ट्रपति मुर्मु ने जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के, दौरान मांझी और चालकी को सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण बताया था।
🟠बस्तर दशहरा की देशभर में अलग पहचान
मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा अपनी लंबी परंपरा, जनजातीय आस्था, लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता के कारण देश के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी अलग पहचान रखता हैं।बस्तर दशहरा की खासियत यह है कि इसमें स्थानीय परंपराओं और सामाजिक भागीदारी की भूमिका महत्वपूर्ण रहती हैं। यही वजह हैं,कि मुरिया दरबार को बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता हैं।
🟠फरवरी में भी बस्तर की संस्कृति से जुड़ी थीं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 7 फरवरी 2026 को जगदलपुर में बस्तर पंडुम 2026 का उद्घाटन किया था। उस अवसर पर उन्होंने बस्तर की प्राचीन परंपराओं को जीवंत बताते हुए, बस्तर दशहरा को जनजातीय संस्कृति और भाईचारे का अनूठा उदाहरण कहा था। उन्होंने विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने की बात भी कही थी।राष्ट्रपति ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपातों, गुफाओं और प्राचीन संस्कृति को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए स्थानीय लोगों और युवाओं की प्रगति को छत्तीसगढ़ के विकास से जोड़ा था।
🟠जुलाई में बस्तर प्रतिनिधिमंडल से हुई थी मुलाकात
30 जुलाई 2026 को बस्तर पंडुम के विजेता दल, परगना मांझी, चालकी और समाज प्रमुखों सहित बस्तर के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की थी।इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा था कि बस्तर पंडुम बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव हैं। उन्होंने यह भी कहा,कि मांझी और चालकी सामाजिक जीवन तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🟠बस्तर की संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा नया मंच
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा,कि बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा हैं। उनके अनुसार मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की उपस्थिति बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगी।उन्होंने कहा,कि बस्तर की संस्कृति यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपराओं और प्रकृति से गहराई से जुड़ी हैं। सरकार का प्रयास हैं,कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन के जरिए,स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार किया जाए।
🟠23 अक्टूबर को जगदलपुर में खास आयोजन
अब सभी की नजर 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में होने वाले मुरिया दरबार पर रहेगी। राष्ट्रपति की प्रस्तावित मौजूदगी के कारण इस आयोजन में बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था,जनजातीय संस्कृति और लोक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने का अवसर मिलेगा।बस्तर के लिए यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी परंपरा, पहचान और सांस्कृतिक विरासत को देश के सामने प्रस्तुत करने का अवसर भी होगा।












