पायल खेमका,रायपुर/छत्तीसगढ़,20अगस्त2025 | विशेष रिपोर्ट — Nexis News
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक ऐसा नाम, जिसने ग्राम पंचायत से अपनी यात्रा शुरू की और आज प्रदेश के कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। यह कहानी है अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल की। एक साधारण परिवार से निकलकर संघर्ष, सेवा और समर्पण के बल पर राजनीति की बुलंदियों तक पहुंचने वाले संघर्ष की प्रतिमूर्ति वाले नेता की…
🟠प्रारंभिक जीवन और परिवार
1 जून 1967 को सरगुजा जिले में जन्मे राजेश अग्रवाल के पिता स्व. चांदीराम अग्रवाल और माता श्रीमती बीरमा देवी अग्रवाल ने उन्हें संस्कार और संघर्ष की राह दिखाई।लखनपुर हायर सेकेंडरी स्कूल से शिक्षा पूरी की और वर्ष 1983 में बारहवीं उत्तीर्ण की। बचपन से ही सरल, मिलनसार और जिम्मेदार स्वभाव ने उन्हें अपने साथियों और समाज में अलग पहचान दी।
🟠राजनीति की शुरुआत
वर्ष 2002 में राजनीति में पहला कदम रखा। ग्राम पंचायत कुँवरपुर में उप सरपंच बने। यही वह दौर था जब उन्होंने जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझा। 2002 से 2005 तक उप सरपंच रहते हुए उन्होंने विकास की छोटी-छोटी नींव डाली। इसके बाद 2014 में लखनपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष चुने गए। 2014 से 2019 तक उन्होंने लखनपुर के विकास कार्यों में अहम भूमिका निभाई। सड़क, पानी, सफाई और जनसुविधाओं में सुधार किया। जनता का विश्वास बढ़ा और यहीं से राजनीति का बड़ा सफर शुरू हुआ।
🟠बड़ा राजनीतिक मोड़ – 2023 चुनाव
2023… छत्तीसगढ़ की राजनीति का ऐतिहासिक साल।
अंबिकापुर सीट से भाजपा ने राजेश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया। सामने थे कांग्रेस के दिग्गज नेता, सरगुजा महाराज व तत्कालीन उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव। लोगों को लगा यह मुकाबला आसान नहीं होगा,लेकिन जनसमर्थन और मेहनत ने बड़ा उलटफेर कर दिखाया। राजेश अग्रवाल ने सिंहदेव जैसे कद्दावर नेता को हराकर विधायक पद हासिल किया। यह जीत सिर्फ चुनावी जीत नहीं थी बल्कि यह उनके संघर्ष और जनता से जुड़ाव का प्रमाण थी।
🟠मंत्री पद तक का सफर
विधानसभा में उनकी सक्रियता, संगठन के प्रति निष्ठा और जनता से जुड़ाव ने उन्हें नई ऊँचाई दिलाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने मंत्रिमंडल में राजेश अग्रवाल को शामिल करने का फैसला किया। आज वे पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग के मंत्री बने हैं।
यह उपलब्धि सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि सरगुजा की जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं का गौरव है।
🟠निजी जीवन और व्यक्तित्व
सरगुजा के लखनपुर निवासी राजेश अग्रवाल का परिवार उनकी ताकत है। पत्नी सुनीता अग्रवाल, एक पुत्र और एक पुत्री के साथ वे एक जिम्मेदार पारिवारिक इंसान भी हैं।
जनता के बीच वे अपने सहज, सरल और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं।
लोग कहते हैं – ‘राजेश भैया’ हर वक्त मदद के लिए खड़े रहते हैं।
🟠जनता की उम्मीदें और भविष्य
आज जब वे मंत्री बने हैं, तो सरगुजा और अंबिकापुर की जनता की निगाहें उन पर टिकी हैं। पर्यटन और संस्कृति विभाग की जिम्मेदारी,धार्मिक स्थलों के विकास की योजना इन सभी के लिए लोग उम्मीद कर रहे हैं कि राजेश अग्रवाल प्रदेश में पर्यटन को नई पहचान देंगे और अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र को विकास की नई ऊँचाई पर ले जाएंगे।
🟠निष्कर्ष
ग्राम पंचायत से लेकर कैबिनेट मंत्री तक का यह सफर आसान नहीं था। संघर्ष, समर्पण और जनता के विश्वास ने राजेश अग्रवाल को इस मुकाम तक पहुँचाया है। अब आने वाला समय तय करेगा कि वे मंत्री पद पर प्रदेश और सरगुजा की जनता की उम्मीदों पर कितने खरे उतरते हैं।
राजनीति की इस प्रेरणादायी यात्रा को आने वाली पीढ़ियाँ याद रखेंगी।












