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भविष्य अंधेरे में: शिक्षकों और सुविधाओं की कमी से आक्रोशित छात्रों का प्रदर्शन

संदिली सिंह,रायपुर,29अगस्त2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News कवर्धा पिपरिया स्थित पीएम स्वामी आत्मानंद शासकीय स्कूल में लंबे समय से चल रही,शिक्षकों की कमी और अव्यवस्था ने आखिरकार छात्र-छात्राओं को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया।शुक्रवार को सैकड़ों छात्रों ने एकजुट होकर स्कूल परिसर के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और घंटों तक नारेबाजी कर विरोध-प्रदर्शन किया।

🟠महीनों से कक्षाएँ प्रभावित

विद्यार्थियों ने बताया,कि स्कूल में फिजिक्स और गणित जैसे मुख्य विषयों के साथ-साथ कई अन्य विषयों के शिक्षक महीनों से अनुपस्थित हैं। लगातार तीन माह से कक्षाएँ प्रभावित हो रही हैं। छात्रों का कहना हैं,कि पढ़ाई न होने से उनकी परीक्षा की तैयारी अधूरी रह गई हैं,और भविष्य अधर में लटक गया हैं।

एक छात्र ने नाराज़गी जताते हुए कहा – “हम हर दिन स्कूल आते हैं, लेकिन विषय शिक्षक न होने से क्लासेस खाली जा रही हैं। अधिकारी सिर्फ भरोसा दिलाते हैं, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं करते।”

🟠मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी

🔸️शिक्षक न होने के साथ-साथ स्कूल में बुनियादी सुविधाओं का भी भारी अभाव हैं।

🔸️पीने के पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हैं।

🔸️सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हैं।

🔸️पियून न होने से बच्चों को ही झाड़ू-पोंछा करना पड़ता हैं।

छात्राओं ने बताया,कि स्वच्छता और पेयजल जैसी जरूरी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई के साथ-साथ उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा हैं।

🟠शिकायतों पर सिर्फ भरोसा

छात्र-छात्राओं ने बताया,कि इन समस्याओं को लेकर कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवेदन दिए गए। अभिभावकों ने भी बैठक कर मामले की गंभीरता बताई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही दिया गया। किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

🟠भविष्य की चिंता, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

गुस्साए छात्रों ने कहा,कि अगर जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई और स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो वे मजबूर होकर बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। उनका कहना हैं,कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए हैं।

🟠शिक्षा विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में

स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि सरकार की ओर से पीएम  आत्मानंद स्कूल जैसे संस्थानों को “आदर्श शिक्षा केंद्र” के रूप में स्थापित करने की योजना थी,लेकिन यहां की स्थिति बिल्कुल उलट हैं। जहां छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर वातावरण देने का वादा किया गया था,वहीं अब बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करने को मजबूर हैं।

अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया हैं।

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