संदिली सिंह,रायपुर,4सितंबर2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
चक्रधर समारोह का आठवां दिन कथक नृत्य की प्रस्तुतियों से सराबोर रहा। रायगढ़ में आयोजित इस कला समारोह में, सात वर्षीय बाल कलाकार आशिका सिंघल के साथ दुर्ग, बेंगलुरू,रायगढ़ और जबलपुर के कथक कलाकारों ने अनुपम प्रस्तुतियां दी।
🟠सात वर्षीय आशिका सिंघल की कथक प्रस्तुति ने किया मंत्रमुग्ध
नन्हीं कथक नृत्यांगना आशिका सिंघल की प्रस्तुति ने, उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। केवल 7 वर्ष की आयु में आशिका ने ‘मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो’ जैसे भक्ति गीत पर अपनी लय और भावपूर्ण अभिनय से मंच की गरिमा बढ़ाई। रायपुर की इस बाल कलाकार ने पिछले चार वर्षों से कथक की साधना की हैं,और विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
🟠दुर्ग की देविका दीक्षित ने दिखाया परंपरा और नवाचार का संगम
दुर्ग की कथक नृत्यांगना देविका दीक्षित ने,अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लगभग 24 वर्षों की साधना और गुरु उपासना तिवारी तथा आचार्य पंडित कृष्ण मोहन मिश्र से प्रशिक्षण के साथ, देविका ने कथक में परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत किया। उन्हें ‘कोविद’ और ‘विशारद’ उपाधियाँ तथा नेशनल नृत्य शिरोमणि पुरस्कार, श्रेष्ठ भारत सम्मान और गोपीकृष्ण नेशनल अवॉर्ड जैसे राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
🟠बेंगलुरू के डॉ. लक्ष्मीनारायण जेना और टीम ने रचा अद्भुत समा
बेंगलुरू के कथक गुरु डॉ. लक्ष्मीनारायण जेना और उनकी टीम ने लखनऊ-जयपुर घराने की शैली में कथक की बारीकियों को प्रस्तुत करते हुए,दर्शकों का मन मोह लिया। उनके साथ मैसुर बी. नागराज, अजय कुमार सिंह, रघुपति झा और विजय ने संगत कर समां और भी भव्य बना दिया।
🟠रायगढ़ घराने की कथक परंपरा को जीवंत किया वासंती वैष्णव ने
रायगढ़ घराने की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना वासंती वैष्णव और उनकी टीम ने गणेश स्तुति, शिव तांडव, वर्षा ऋतु और तबला-घुंघरुओं की जुगलबंदी के माध्यम से कथक की शास्त्रीय प्रस्तुति दी। रायगढ़ घराने की स्थापना राजा चक्रधर सिंह द्वारा हुई थी,और यह घराना अपनी धीमी और तेज गति की प्रस्तुतियों के लिए जाना जाता हैं।
🟠जबलपुर की गुरु नीलांगी कालांतरे ने बिखेरी कला की छटा
कथक गुरु नीलांगी कालांतरे ने,पारंपरिक कथक की बारीकियों और आधुनिक प्रयोगों का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।उनकी भाव-भंगिमा, ताल और नृत्य मुद्राओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में उपस्थित कला प्रेमियों ने,सभी प्रस्तुतियों को तालियों और उत्साहवर्धन से सराहा। इस तरह चक्रधर समारोह 2025 का आठवां दिन कथक की अद्भुत प्रस्तुतियों से यादगार बन गया।












