संदिली सिंह,राउरकेला,3अक्टूबर2025,विशेष रिपोर्ट-Nexis News
स्टेशन रोड दुर्गा पूजा पंडाल में विजयादशमी के अवसर पर बंगाली परंपरा के अनुरूप सिंदूर खेला का आयोजन किया गया। यह अनुष्ठान मुख्य रूप से बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ सहित देश और विदेश में बसे बंगाली समुदायों के बीच विशेष महत्व रखता हैं।
चार दिनों तक चले दुर्गा पूजा उत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं ने माँ दुर्गा की विदाई दी। इस दौरान विवाहित महिलाओं ने माँ दुर्गा के माथे और चरणों पर सिंदूर अर्पित किया। यह परंपरा वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि, पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं।महिलाओं ने एक-दूसरे को भी सिंदूर लगाया और सुखी दांपत्य जीवन, खुशी और समृद्धि की कामना की। इस अवसर ने नारी शक्ति, एकता और सामाजिक बंधन को भी मजबूत किया।
हिंदू परंपरा के अनुसार, सिंदूर वैवाहिक स्थिति का प्रतीक है और इसका गहरा धार्मिक महत्व हैं। विजयादशमी पर मनाया जाने वाला यह अनुष्ठान नारीत्व, भक्ति और सामूहिक शक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय की याद दिलाता यह पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत और स्त्री शक्ति के उत्सव का प्रतीक हैं। महिलाओं के इस पारंपरिक अनुष्ठान ने नारी प्राधान्य के महत्व को भी दर्शाया।












