संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,18जून2026
राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में,आयोजित आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव आध्यात्मिक आस्था और संस्कृति का भव्य संगम बन गया। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए तथा जैन मुनियों का आशीर्वाद प्राप्त कर आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हो रहे पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज को नमन किया।मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए ने कहा कि आचार्य पद केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि तप, त्याग, ज्ञान और समाज को दिशा देने वाली साधना का सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के अहिंसा, करुणा, आत्मसंयम और शांति के सिद्धांत आज भी मानवता को सही मार्ग दिखा रहे हैं। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जैन दर्शन की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज के आचार्य पदारोहण को जैन समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा,कि शतावधानी हंसभद्र मुनि जी महाराज की विलक्षण स्मरणशक्ति, ज्ञान और साधना समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा, कि भौतिक संसाधन केवल सुविधाएं दे सकते हैं, लेकिन जीवन का वास्तविक सुख आत्मनियंत्रण और आध्यात्मिक साधना से प्राप्त होता हैं।मुख्यमंत्री ने कहा,कि छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार आयोजित यह आचार्य पदारोहण महोत्सव पूरे प्रदेश के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय हैं। उन्होंने कहा,कि श्रद्धा, साधना और संस्कृति का यह विराट आयोजन छत्तीसगढ़ में आध्यात्मिक चेतना का नया अध्याय लिख रहा हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा,कि पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज का आचार्य पद पर पदारोहण उनके तप, संयम, ज्ञान और समाज के प्रति समर्पण का सम्मान हैं। वहीं मात्र 14 वर्ष की आयु में शतावधानी हंसभद्रमुनि जी महाराज की असाधारण स्मरणशक्ति और ज्ञान-साधना सभी के लिए प्रेरणादायक हैं।उन्होंने कहा,कि आज रायपुर का इंडोर स्टेडियम ज्ञान, साधना और अध्यात्म का तीर्थस्थल बन गया है। भगवान महावीर का ‘जियो और जीने दो’ का संदेश आज के समय में विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेशों में से एक हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ने जैन संतों के तप, त्याग और संयमपूर्ण जीवन को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। वहीं ने कहा,कि यह आयोजन लोगों को अध्यात्म, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।महोत्सव में देशभर से आए संत-साध्वियों, श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों की बड़ी उपस्थिति रही। पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर नजर आया।












