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दुर्गापुर माइंस परियोजना पर उठे सवाल, जनसुनवाई और पुनर्वास को लेकर ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

न्यूज डेस्क,छाल,छत्तीसगढ़,23जून2026

एसईसीएल की प्रस्तावित दुर्गापुर कोयला खदान परियोजना को लेकर,प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों में असमंजस और नाराजगी बढ़ती जा रही हैं। वर्ष 2016 में लगभग 1595 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अब तक जनसुनवाई नहीं हो सकी हैं,और न ही परियोजना के संचालन को लेकर कोई स्पष्ट समय-सीमा सामने आई हैं। इससे प्रभावित गांवों के लोगों के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई हैं।

लोगों की मांग हैं,कि खनन कार्य शुरू करने से पहले पुनर्वास स्थल का चयन कर उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को भविष्य को लेकर स्पष्टता मिल सके।परियोजना क्षेत्र में यह चर्चा भी चल रही हैं,कि शाहपुर गांव की लगभग 200 एकड़ भूमि और रिहायशी क्षेत्र को अधिग्रहण से बाहर रखा जा सकता हैं। इस संभावना को लेकर अन्य प्रभावित गांवों के लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोयला भंडार मौजूद हैं,तो सभी प्रभावितों के साथ समान नीति अपनाई जानी चाहिए।मुआवजे को लेकर भी ग्रामीणों में असंतोष दिखाई दे रहा हैं। प्रभावित परिवारों का कहना हैं,कि अलग-अलग गांवों के लिए अलग-अलग बाजार मूल्य निर्धारित कर मुआवजा तय करना न्यायसंगत नहीं हैं। उनकी मांग हैं,कि सभी प्रभावितों को समान आधार पर मुआवजा दिया जाए और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता बरती जाए।

रोजगार का मुद्दा भी ग्रामीणों की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। लोगों का कहना हैं,कि भूमि अधिग्रहण के बाद आजीविका प्रभावित होगी, इसलिए केवल मुआवजा पर्याप्त नहीं हैं। परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार और पुनर्वास की स्पष्ट नीति घोषित की जानी चाहिए।ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में विरोध के प्रमुख कारणों में मुआवजे में असमानता, कुछ क्षेत्रों को अधिग्रहण से बाहर रखने की चर्चा, वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा नहीं मिलना तथा रोजगार को लेकर स्पष्टता का अभाव शामिल हैं।प्रभावित परिवारों का कहना हैं,कि यदि पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार जैसे मुद्दों पर संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में परियोजना को व्यापक विरोध का सामना करना पड़ सकता हैं। फिलहाल क्षेत्र के लोग जनसुनवाई और एसईसीएल की आधिकारिक स्थिति का इंतजार कर रहे हैं।

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