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रामगढ़ महोत्सव में संस्कृति का महाकुंभ : रामलीला, ‘जटायु मोक्ष’ और कवि सम्मेलन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

न्यूज डेस्क,अंबिकापुर,छत्तीसगढ़,30जून2026

सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय,रामगढ़ महोत्सव-2026 के पहले दिन संस्कृति, कला और साहित्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामगढ़ की पावन धरती पर आयोजित इस भव्य महोत्सव में, रामलीला, लोकनृत्य, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ जैसी प्रस्तुतियों ने हजारों दर्शकों को भावविभोर कर दिया।नई दिल्ली से आए ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने, भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों पर आधारित भव्य रामलीला का मंचन किया। आकर्षक वेशभूषा, जीवंत अभिनय, प्रभावशाली संवाद, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत ने दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गूंज से गूंजता रहा।महोत्सव का सबसे भावुक क्षण तब आया जब कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय,उदयपुर की छात्राओं ने ‘जटायु मोक्ष’ पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को बालिकाओं ने बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली अंदाज में मंचित किया। उत्कृष्ट अभिनय, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और पारंपरिक प्रस्तुति ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।कार्यक्रम का एक और प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा,जहां देश के प्रतिष्ठित कवियों ने राष्ट्रभक्ति, संस्कृति, सामाजिक सरोकार, वीर रस, हास्य-व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का सशक्त पाठ किया। ओजस्वी कविताओं ने जहां जोश भर दिया, वहीं हास्य-व्यंग्य ने पूरे माहौल को आनंदमय बना दिया।इसके अलावा सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत और अन्य लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने, सरगुजा की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत कर दिया। स्थानीय कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और क्षेत्रीय संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी।रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा की ऐतिहासिक धरोहर, साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना हैं। प्रथम दिवस के भव्य आयोजन ने इस उद्देश्य को सार्थक रूप से साकार किया। महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

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