न्यूज डेस्क,अंबिकापुर,छत्तीसगढ़,11जुलाई2026
अपराधों की जांच को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और दोषसिद्धि उन्मुख बनाने के उद्देश्य से सरगुजा पुलिस ने,जिले के विवेचकों के लिए एनडीपीएस एक्ट, एससी-एसटी एक्ट, साइबर क्राइम और फॉरेंसिक विज्ञान पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में आयोजित इस कार्यशाला में जांच अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, डिजिटल साक्ष्यों और वैज्ञानिक विवेचना की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया।कार्यशाला का आयोजन डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन में किया गया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लों, एसडीओपी तुल सिंह पट्टावी, अतिरिक्त लोक अभियोजक नरेंद्र पाण्डेय, नितेश चंद्र शुक्ला, मनोज तिवारी, एफएसएल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी तथा जिले के सभी थाना-चौकी प्रभारी और विवेचक मौजूद रहे।
🟠डिजिटल साक्ष्यों पर रहेगा विशेष फोकस
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लों ने, कहा कि अपराधों की प्रभावी विवेचना के लिए अब केवल पारंपरिक साक्ष्य ही नहीं,बल्कि डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का अधिकतम उपयोग करना आवश्यक हैं। उन्होंने विवेचकों को प्रत्येक प्रकरण में तकनीकी साक्ष्यों को शामिल करने के निर्देश दिए, ताकि न्यायालय में मजबूत और प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।
🟠NDPS मामलों की जांच पर विशेष प्रशिक्षण
कार्यशाला में विवेचकों को एनडीपीएस एक्ट के प्रावधान, घटनास्थल की वीडियोग्राफी, टेस्टिंग किट का उपयोग, व्यावसायिक मात्रा वाले मामलों में आर्थिक जांच तथा PIT-NDPS के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही मादक पदार्थों की पहचान और विवेचना में होने वाली सामान्य त्रुटियों पर भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।
🟠SC-ST एक्ट और साइबर अपराधों की जांच पर जोर
एससी-एसटी एक्ट के मामलों में त्वरित जांच, अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं के पालन और निष्पक्ष विवेचना पर विशेष मार्गदर्शन दिया गया। वहीं साइबर अपराधों में बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराने, ट्रांजैक्शन की जानकारी जुटाने, आईपी एड्रेस और मोबाइल डेटा प्राप्त करने तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के तरीकों की जानकारी दी गई।
🟠फॉरेंसिक तकनीक से बढ़ेगी जांच की गुणवत्ता
कार्यशाला में अपराध स्थल को सुरक्षित रखने, वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र करने, पैकिंग, फिंगरप्रिंट विकसित करने, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और अदालत में स्वीकार्य बनाने की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। अधिकारियों ने साक्ष्यों को नष्ट या दूषित होने से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियों की भी जानकारी दी।सरगुजा पुलिस का मानना हैं,कि इस तरह के प्रशिक्षण से विवेचना की गुणवत्ता में सुधार होगा, दोषसिद्धि दर बढ़ेगी और अपराधियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।












