संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,17जुलाई2026
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने, उद्योग, निवेश और रोजगार को नई गति देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026’ को पारित कर दिया हैं। इस कानून के लागू होने के बाद,छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनेगा, जहां उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए, रिस्क-बेस्ड (Risk-Based) और ट्रस्ट-बेस्ड (Trust-Based) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू होगा।नई व्यवस्था का उद्देश्य कारोबार शुरू करने और संचालित करने की जटिल सरकारी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना हैं,ताकि निवेशकों और उद्यमियों को अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
🟠छोटे कारोबारियों और MSME को मिलेगी सबसे बड़ी राहत
विधेयक के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उनके आकार, गतिविधि और जोखिम के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।कम जोखिम वाले उद्योगों और छोटे कारोबारों को अब लंबी और जटिल अनुमति प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। उन्हें सरल और त्वरित मंजूरी मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में सुरक्षा और तकनीकी मानकों के अनुरूप निरीक्षण और परीक्षण पहले की तरह जारी रहेंगे।इससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा।
🟠अब मिलेगा Auto Approval, खत्म होगी फाइलों की लंबी प्रतीक्षा
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत ऑटो अप्रूवल सिस्टम हैं।यदि संबंधित विभाग निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन पर निर्णय नहीं लेता,तो पात्र मामलों में अनुमति स्वत स्वीकृत मानी जाएगी।इस व्यवस्था से उद्योगों की स्थापना में होने वाली अनावश्यक देरी समाप्त होगी और निवेशकों का समय एवं लागत दोनों बचेंगे।
🟠Self Certification से आसान होगी अनुमति प्रक्रिया
कम जोखिम वाले उद्योगों में बार-बार होने वाले, सरकारी निरीक्षणों की जगह अब सेल्फ सर्टिफिकेशन या अधिकृत इंजीनियर,आर्किटेक्ट एवं अन्य विशेषज्ञों के प्रमाणन को मान्यता दी जाएगी।इससे उद्यमियों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा और सरकारी व्यवस्था अधिक जवाबदेह एवं पारदर्शी बनेगी।
🟠हर साल लाइसेंस रिन्यू कराने की बाध्यता खत्म
नए कानून के तहत व्यवसायियों को हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण की अनिवार्यता से भी राहत मिलेगी।जोखिम आधारित प्रणाली लागू होने के बाद उद्यमियों को बार-बार दस्तावेज जमा करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
🟠किसानों और ग्रामीण उद्योगों को भी मिलेगा लाभ
एमएसएमई इकाइयों के लिए जल प्रदाय अनुमति, भवन अनुज्ञा, सोसायटी एवं फर्म पंजीयन जैसी कई सेवाएं अब सरल, डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया से उपलब्ध होंगी।इससे ग्रामीण उद्योगों, स्टार्टअप्स और नए उद्यमियों के लिए कारोबार शुरू करना पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा।
🟠8 विभागों की 43 सेवाएं होंगी ऑनलाइन और जोखिम आधारित
विधेयक के तहत राज्य शासन के 8 विभागों की 43 सेवाओं को रिस्क-बेस्ड परमिशन सिस्टम में शामिल किया गया हैं।आवश्यकता के अनुसार भविष्य में और भी विभागों एवं सेवाओं को इस व्यवस्था में जोड़ा जाएगा।
🟠तीन स्तर पर होगी निगरानी
नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया हैं—
🔸️मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय परिषद
🔸️मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति
🔸️कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति
🔸️ये समितियां पूरे सिस्टम की निगरानी करेंगी और समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करेंगी।
🟠15 लाख से अधिक MSME को मिलेगा सीधा फायदा
राज्य सरकार का अनुमान हैं,कि इस कानून से 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को, प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।नई व्यवस्था से कारोबार शुरू करने का समय कम होगा, निवेश बढ़ेगा,उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के, नेतृत्व में यह सुधार छत्तीसगढ़ को देश के सबसे निवेश-अनुकूल राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा हैं।












