सर्पदंश से मौत रोकने की तैयारी तेज, बलरामपुर में स्वास्थ्यकर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,21जुलाई 2026

जिले में सर्पदंश से होने वाली मौतों और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं को कम करने के उद्देश्य से,राष्ट्रीय सर्पदंश रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा संगवारी संस्थान के सहयोग से, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में सर्पदंश पीड़ितों को,समय पर वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना और मृत्यु दर में कमी लाना हैं।

कार्यशाला में डीएनबी फैमिली मेडिसिन विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक डॉ. चैतन्य मलिक ने स्वास्थ्यकर्मियों को, सर्पदंश की सही पहचान, प्राथमिक उपचार, विषैले एवं अविषैले सर्पों में अंतर, एंटी स्नेक वेनम (ASV) के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक उपयोग तथा रैपिड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज के त्वरित प्रबंधन और जीवनरक्षक उपचार की प्रक्रिया पर भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया।

🟠झाड़-फूंक नहीं, समय पर इलाज से बच सकती हैं,जान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए,मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने कहा,कि सर्पदंश बलरामपुर जैसे वन एवं ग्रामीण क्षेत्रों वाले जिले में एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती हैं। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि प्रत्येक पीड़ित को समय पर सही उपचार मिल सके।

उन्होंने कहा,कि एंटी स्नेक वेनम और वैज्ञानिक उपचार के माध्यम से अधिकांश सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाई जा सकती हैं। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे लोगों को झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार पर भरोसा करने के बजाय सर्पदंश की स्थिति में तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के लिए जागरूक करें।

🟠ग्रामीण और वन क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर

सीएमएचओ ने कहा कि जंगल और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने एवं कार्य करने वाले लोगों को सर्पदंश से बचाव के उपाय, सावधानियां तथा आपातकालीन स्थिति में, अपनाई जाने वाली सही प्रक्रिया के बारे में लगातार जागरूक किया जाना चाहिए। इससे समय पर उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी और सर्पदंश से होने वाली मौतों में कमी लाई जा सकेगी।कार्यशाला में जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से आए चिकित्सा अधिकारी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्सों ने भाग लिया तथा प्रशिक्षण प्राप्त किया।

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