न्यूज डेस्क,अंबिकापुर,छत्तीसगढ़,27जुलाई 2026
नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण विवेचना और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से,सरगुजा पुलिस द्वारा पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर,अंबिकापुर में एक दिवसीय विवेचना कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह राजपूत सहित न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने विवेचकों को अनुसंधान की बारीकियों, कानूनी प्रक्रियाओं और न्यायालयीन अपेक्षाओं से अवगत कराया।डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारी, प्रशिक्षु उप निरीक्षक तथा विवेचक शामिल हुए।
🟠न्यायालय ने बताए गुणवत्तापूर्ण विवेचना के महत्वपूर्ण पहलू
कार्यशाला में माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह राजपूत ने,विवेचकों को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), ई-साक्ष्य (E-Evidence), घटनास्थल पर टेस्टिंग किट के उपयोग, साक्ष्य अधिनियम के तहत मेमोरेंडम तैयार करने तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण पर विस्तृत जानकारी दी।उन्होंने कहा,कि किसी भी अपराध को प्रमाणित करने के लिए सभी साक्ष्यों का आपस में तार्किक रूप से जुड़ा होना आवश्यक हैं। साथ ही घटनास्थल का सटीक विवरण, एफएसएल टीम के साथ समन्वय और प्रत्येक साक्ष्य का सही दस्तावेजीकरण न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाता हैं।
🟠केस डायरी और गिरफ्तारी प्रक्रिया पर विशेष जोर
माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ममता पटेल ने, विवेचकों को निर्देश दिए,कि केस डायरी हमेशा सीलबंद अवस्था में न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। उन्होंने घटनास्थल का नजरी नक्शा, मोबाइल से फोटो दस्तावेजीकरण, रक्त समूह परीक्षण, जब्त सामग्री का वैज्ञानिक मिलान और गवाहों की उपस्थिति में जब्ती प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पल्लव रघुवंशी ने गिरफ्तारी संबंधी कानूनी प्रावधानों, पुलिस रिमांड, ट्रांजिट रिमांड, हथकड़ी उपयोग के दिशा-निर्देश, महिला आरोपियों की गिरफ्तारी, नोटिस की तामिली, एनडीपीएस एक्ट, एससी-एसटी एक्ट, खात्मा खरीजी एवं पशु क्रूरता से जुड़े मामलों की विवेचना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
🟠किशोर न्याय अधिनियम पर भी मिला प्रशिक्षण
प्रधान मजिस्ट्रेट (किशोर न्याय बोर्ड) कल्पना भगत ने जेजे एक्ट के तहत विवेचना की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा,कि विधि से संघर्षरत बालकों के मामलों में पुलिस को संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में पुलिस सादी वर्दी में पहुंचे, बालकों की सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट तैयार करे, निर्धारित समय में प्रकरण किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करे तथा थाना एवं चौकी स्तर पर बाल हितैषी (Child Friendly) वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
🟠विवेचकों को दिए गए प्रभावी अनुसंधान के दिशा-निर्देश
कार्यशाला में ई-साक्ष्य के उपयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान, केस डायरी लेखन, साक्ष्य संरक्षण, फोरेंसिक जांच, एनडीपीएस एक्ट, एससी-एसटी एक्ट, मोटर दुर्घटना प्रकरण, किशोर न्याय अधिनियम तथा नए आपराधिक कानूनों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।प्रशिक्षण का उद्देश्य विवेचना में होने वाली सामान्य त्रुटियों को दूर कर पुलिस अधिकारियों की जांच क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना था, ताकि अपराधों की विवेचना न्यायालय की अपेक्षाओं के अनुरूप हो सके।
🟠समापन पर न्यायपालिका का जताया आभार
कार्यशाला के समापन अवसर पर डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल ने माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा उपस्थित सभी न्यायिक अधिकारियों का मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी विवेचकों को निर्देश दिया,कि कार्यशाला में दिए गए दिशा-निर्देशों का अक्षरश पालन करें, ताकि गुणवत्तापूर्ण विवेचना के माध्यम से पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाया जा सके।












