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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री से बुनकर समाज की सौजन्य भेंट

संदिली सिंह,रायपुर,7अगस्त 2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के पावन अवसर पर, छत्तीसगढ़ बुनकर समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उनके रायपुर स्थित निवास कार्यालय में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बुनकरों द्वारा निर्मित पारंपरिक करघे की प्रतिकृति भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय भेंट को समाज के सम्मान, परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक बताते हुए,  बुनकर समाज को शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा, कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में हथकरघा उद्योग का विशेष स्थान हैं। यह उद्योग केवल वस्त्र निर्माण की कला नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और आत्मनिर्भरता की जड़ों से जुड़ा हुआ जीवंत माध्यम हैं। बुनकर समाज की रचनात्मकता, शुद्ध श्रम और पारंपरिक कौशल ने राज्य को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई हैं।

मुख्यमंत्री ने बुनकरों की सराहना करते हुए कहा, कि यह समाज न केवल आर्थिक दृष्टि से प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का भी संवाहक हैं। उन्होंने कहा, कि राज्य सरकार बुनकरों के सशक्तिकरण, समृद्धि और आत्मनिर्भरता हेतु हर स्तर पर प्रतिबद्ध हैं। शासन द्वारा कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन लागत में कमी, आधुनिक उपकरणों का प्रशिक्षण और विपणन की व्यवस्था जैसे अनेक पहलुओं पर विशेष योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।

🟠”वोकल फॉर लोकल” और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान को दोहराते हुए, मुख्यमंत्री साय ने कहा, कि अब समय आ गया हैं, जब हमें अपने पारंपरिक उत्पादों को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि विकास और वैश्विक पहचान की दिशा में भी ले जाना होगा। हथकरघा केवल एक पारंपरिक उद्योग नहीं, बल्कि यह हमारी रचनात्मक आत्मा और सांस्कृतिक चेतना का सजीव रूप हैं, जिसे बुनकर आज भी समर्पण भाव से सहेजे हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा, कि छत्तीसगढ़ में तैयार किए जाने वाले हथकरघा उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग की जा रही हैं,ताकि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में स्थान मिल सके। इससे न केवल राज्य के शिल्पकारों को पहचान मिलेगी, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

🟠मुख्यमंत्री को भेंट की गई करघा प्रतिकृति बनी आकर्षण का केंद्र:

प्रतिनिधिमंडल द्वारा भेंट की गई करघे की प्रतिकृति को मुख्यमंत्री ने “सृजन और परंपरा का प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा, कि यह भेंट न केवल भावनात्मक जुड़ाव का संकेत हैं, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाती हैं, कि हमारी सांस्कृतिक नींव कितनी मजबूत हैं। मुख्यमंत्री ने इसे मुख्यमंत्री निवास के सांस्कृतिक स्मृति कोष में सुरक्षित रखने की घोषणा की।

🟠सरकार की प्राथमिकता में बुनकर समाज:

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा, कि छत्तीसगढ़ सरकार बुनकर समाज के समग्र विकास और संरक्षण के लिए कटिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, कि सरकार की योजनाओं का मुख्य उद्देश्य हैं, बुनकरों को तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और विपणन के बेहतर साधन उपलब्ध कराना, जिससे वे बदलते समय के साथ कदमताल कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा, कि आने वाले समय में बुनकरों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएंगे, जिससे उनके उत्पाद देश और दुनिया तक सीधे पहुँच सकें। राज्य में बुनकर हब की स्थापना, हथकरघा मेलों का आयोजन और डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर जैसे प्रकल्पों पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा हैं।

🟠प्रतिनिधिमंडल ने जताया आभार, रखीं कुछ ज़रूरी माँगें:

इस मौके पर बुनकर समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश देवांगन, पुरुषोत्तम देवांगन, धनेश देवांगन, गजेंद्र देवांगन और अन्य कई वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया, कि बुनकरों के लिए संचालित योजनाओं में और अधिक विस्तार किया जाए तथा नवाचारों को सम्मिलित करते हुए, युवा बुनकरों को प्रशिक्षण और ऋण सुविधा दी जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त करते हुए कहा,कि बुनकर समाज की हर समस्या और जरूरत को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा, ताकि वे न केवल आत्मनिर्भर बनें, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को और अधिक गौरवशाली बना सकें।

 

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