गोपाल अग्रवाल,रायपुर,20अगस्त2025 | विशेष रिपोर्ट — Nexis News
हर साल 20 अगस्त को भारत में “सद्भावना दिवस” मनाया जाता है। यह दिन देश में शांति, राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द के मूल्यों को मजबूत करने के लिए समर्पित है। यह दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर मनाया जाता है, जिन्होंने भारत को आधुनिक तकनीकी और प्रगतिशील विचारों की दिशा में आगे बढ़ाने का सपना देखा था।
🟠सद्भावना दिवस का उद्देश्य
सद्भावना का अर्थ है, सभी के प्रति सद्भाव, मित्रता और समानता का भाव रखना। इस दिन लोगों को यह संकल्प दिलाया जाता है कि वे धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर भारतीयता और मानवता की भावना को प्राथमिकता देंगे।
🟠राजीव गांधी और सद्भावना का संदेश
राजीव गांधी का मानना था कि “भारत की ताकत उसकी विविधता में है।”, उन्होंने युवाओं के हाथों में देश का भविष्य देखा और सूचना प्रौद्योगिकी, पंचायती राज व्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाए। उनकी जयंती को “सद्भावना दिवस” के रूप में मनाना इस बात का प्रतीक है कि भारत केवल विकास से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और भाईचारे से ही मजबूत बनता है।
🟠सद्भावना दिवस पर शपथ
इस दिन सरकारी संस्थानों, विद्यालयों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों में लोग एक शपथ लेते हैं:
“मैं जाति, समुदाय, क्षेत्र, धर्म या भाषा के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करूंगा। मैं भारत की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहूंगा।”
🟠आज की पीढ़ी के लिए संदेश
आज जब समाज में कई बार विभाजन और असहिष्णुता के स्वर सुनाई देते हैं, तो सद्भावना दिवस हमें याद दिलाता है कि –
🔸विविधता हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं।
🔸भाईचारे से ही लोकतंत्र मजबूत होता है।
🔸प्रगति तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिले।
🟠निष्कर्ष
सद्भावना दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान है। यह दिन हमें सिखाता है कि यदि हम प्रेम, सहयोग और एकता की भावना से आगे बढ़ें, तो भारत दुनिया में शांति और प्रगति का सबसे बड़ा उदाहरण बन सकता है।












