संदिली सिंह,रायपुर/छत्तीसगढ़,25सितंबर2025,विशेष रिपोर्ट-Nexis News
शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की आराधना को समर्पित हैं। मान्यता हैं,कि मां कुष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। यही कारण हैं,कि इन्हें ‘ब्रह्मांड सृजक’ भी कहा जाता हैं। भक्तों का विश्वास हैं,कि इस दिन मां की पूजा करने से जीवन में आरोग्य, ऊर्जा, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता हैं।
🟠मां कुष्मांडा का स्वरूप
🔸️मां कुष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं।
🔸️उनके हाथों में कमल, धनुष-बाण, अमृतकलश, चक्र और गदा सुशोभित रहते हैं।
🔸️मां सिंह पर विराजमान होती हैं और उनकी मुस्कान से संसार में प्रकाश फैला।
🟠पूजा विधि और महत्व
🔸️आज भक्त मां कुष्मांडा को पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और फल अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
🔸️सुबह स्नान कर पीले अथवा नारंगी वस्त्र धारण करने का विशेष महत्व हैं।
🔸️मां को मालपुआ और मीठे व्यंजन का भोग लगाना शुभ माना जाता हैं।
🔸️इस दिन हृदय चक्र (अनाहत चक्र) की साधना करने से साधक को आध्यात्मिक उन्नति मिलती हैं।
🟠आशीर्वाद का संदेश
धार्मिक मान्यता है कि मां कुष्मांडा की पूजा से रोगों का नाश होता हैं,जीवन में ऊर्जा का संचार होता हैं और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती हैं। मां की कृपा से साधक को आरोग्य, ऐश्वर्य और दीर्घायु का वरदान प्राप्त होता हैं।
👉 नवरात्रि के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां कुष्मांडा का ध्यान कर यह प्रार्थना करते हैं,कि उनकी कृपा से समस्त दुःख दूर हों और जीवन सुख-शांति से परिपूर्ण हो।












