जशपुर में नए आपराधिक कानूनों पर मंथन, न्यायपालिका-पुलिस-अभियोजन के अधिकारियों की संयुक्त कार्यशाला आयोजित

न्यूज डेस्क,जशपुर,छत्तीसगढ़,13जून2026 भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य, अधिनियम (BSA) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा अनुसंधान अधिकारियों की क्षमता वृद्धि के उद्देश्य से, पुलिस अधीक्षक कार्यालय जशपुर के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन और फॉरेंसिक विभाग के अधिकारियों ने भाग लेकर नए आपराधिक कानूनों की बारीकियों पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यशाला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्येन्द्र कुमार साहू, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम देवांगन, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमन सिंह, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार, उप संचालक अभियोजन सुरेश साहू, जिला अभियोजन अधिकारी विपिन शर्मा, फॉरेंसिक अधिकारी सलीम कुजूर सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, विवेचक एवं अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहे।कार्यशाला में नवीन आपराधिक कानूनों के विभिन्न प्रावधानों, वैज्ञानिक एवं डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, न्यायालयीन अपेक्षाओं तथा अभियोजन की सफलता सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया,कि वर्तमान समय में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है, इसलिए उनके विधिसम्मत संग्रहण और संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता हैं।डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा,कि नए आपराधिक कानून पीड़ित-केंद्रित, त्वरित और न्यायसंगत न्याय व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने तकनीक आधारित अनुसंधान, पारदर्शिता और समयबद्ध विवेचना को नए कानूनों की प्रमुख विशेषता बताया।जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्येन्द्र कुमार साहू ने विवेचकों को वैज्ञानिक जांच, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण, एफएसएल रिपोर्ट के महत्व तथा निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के संबंध में विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावी और साक्ष्य आधारित विवेचना ही न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाती हैं।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमन सिंह ने केस डायरी के नियमित संधारण, अनुसंधान प्रतिवेदन की स्पष्टता और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विधिसम्मत दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर दिया। वहीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम देवांगन ने गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और वैज्ञानिक साक्ष्यों के समन्वित विश्लेषण को न्यायिक सफलता की कुंजी बताया।कार्यशाला के अंत में न्यायिक अधिकारियों, अभियोजन अधिकारियों और विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागियों ने नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और गुणवत्तापूर्ण विवेचना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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