न्यूज डेस्क,रायगढ़,छत्तीसगढ़,14जून2026
रायगढ़ जिले के छाल उपक्षेत्र में स्थित एसईसीएल (SECL) की लात खुली खदान के विस्तारीकरण को लेकर किसानों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही हैं। प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया हैं, कि बिना भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया पूरी किए उनकी निजी जमीनों पर खदान का ओवरबर्डन (ओबी) और मिट्टी डंप की जा रही हैं।जानकारी के अनुसार, एसईसीएल लात खुली खदान की उत्पादन क्षमता 3 मिलियन टन से बढ़ाकर 6 मिलियन टन करने की दिशा में कार्य कर रहा हैं। किसानों का आरोप है कि परियोजना विस्तार के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही कार्य शुरू कर दिया गया हैं।
🟠उपजाऊ जमीन पर डंपिंग से फसलें हुई बर्बाद
ग्राम पंचायत एडू के किसान जय राठिया और उत्तरा कुमार राठिया ने आरोप लगाया,कि उनकी निजी स्वामित्व वाली कृषि भूमि पर ठेका कंपनी एसकेए द्वारा बिना अनुमति और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के ओबी और मिट्टी डंप कर दी गई। इससे उनकी उपजाऊ जमीन और खड़ी फसल पूरी तरह प्रभावित हुई हैं।पीड़ित किसानों का कहना हैं,कि विरोध करने पर ठेका कंपनी ने जिम्मेदारी लेने के बजाय पूरा मामला एसईसीएल प्रबंधन पर डाल दिया। वहीं अब तक उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा या राहत नहीं मिली हैं।
🟠प्रशासन और प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों का सवाल हैं,कि यदि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई हैं,तो निजी जमीनों पर डंपिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई। किसानों का आरोप हैं,कि वे वर्षों से न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला हैं।
🟠न्याय और मुआवजे की मांग तेज
प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और एसईसीएल के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने तथा किसानों को उचित मुआवजा और न्याय दिलाने की मांग की हैं। ग्रामीणों का कहना हैं,कि विकास कार्यों के नाम पर किसानों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।अब सभी की नजर जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं,कि प्रभावित किसानों की समस्याओं का समाधान कैसे किया जाता हैं।












