न्यूज डेस्क,छाल,छत्तीसगढ़,17जून2026
छाल से एडू तक जाने वाली स्टेट हाईवे सड़क आज क्षेत्रीय विकास की नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता और राजनीतिक वादाखिलाफी की पहचान बन चुकी हैं। वर्षों से अधूरी पड़ी यह सड़क अब स्थानीय लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं। गर्मियों में धूल के गुबार ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था और अब मानसून की दस्तक के साथ यही सड़क दलदल, कीचड़ और जानलेवा गड्ढों में तब्दील होने की कगार पर हैं।जिस सड़क को क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों की रीढ़ माना जाता हैं,वही सड़क आज हजारों ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबसे बड़ा कारण बन गई हैं। सड़क की बदहाली को लेकर जनता में गहरा आक्रोश हैं,और लोग पूछ रहे हैं,कि आखिर वर्षों से केवल आश्वासन ही क्यों मिल रहे हैं?
🟠करोड़ों के बजट का हिसाब कौन देगा?
छाल-एडू सड़क के निर्माण और उन्नयन के लिए समय-समय पर करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के दावे किए गए। टेंडर हुए, शिलान्यास हुए, घोषणाएं हुईं, लेकिन सड़क की तस्वीर नहीं बदली। आज भी कई हिस्से अधूरे पड़े हैं, जबकि जहां निर्माण हुआ हैं,वहां गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि सड़क निर्माण की गति इतनी धीमी रही,कि एक पीढ़ी इंतजार करते-करते बूढ़ी हो गई, लेकिन सड़क पूरी नहीं हो सकी।चुनावी मंचों पर गूंजा मुद्दा, जमीन पर नहीं दिखा असर।
🟠यह सड़क वर्षों से राजनीतिक बहस का विषय रही हैं
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल में सड़क निर्माण जल्द पूरा कराने की घोषणा की थी। इसके बाद भाजपा नेताओं ने परिवर्तन यात्रा के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार और क्षेत्रीय नेतृत्व पर विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाया था।लेकिन आज जब प्रदेश में भाजपा सरकार को भी पर्याप्त समय हो चुका है, तब भी सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। इससे लोगों में यह धारणा मजबूत हो रही हैं,कि सड़क केवल चुनावी भाषणों और राजनीतिक बयानबाजी का माध्यम बनकर रह गई हैं।
🟠धूल का जहर झेल चुके लोग, अब दलदल का डर
गर्मियों के दौरान इस सड़क पर उड़ने वाली धूल से राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई बार हालात ऐसे बने कि सामने चल रहे वाहन तक दिखाई नहीं देते थे।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि धूल से सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही थीं। अब बारिश शुरू होने वाली हैं,और सड़क पर बने गहरे गड्ढे पानी से भर जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
🟠कोयला परिवहन भी बना बड़ी वजह
क्षेत्रवासियों का मानना हैं,कि इस मार्ग पर लगातार चलने वाले भारी कोयला वाहनों और ओवरलोड ट्रकों ने सड़क की हालत को और खराब कर दिया हैं। लोगों का आरोप हैं,कि संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार विभागों ने समय रहते रखरखाव और मरम्मत की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए।
🟠जनता के सब्र का बांध टूटने लगा
ग्रामीणों का कहना हैं,कि वर्षों से ज्ञापन, मांग और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला। अब लोगों को लगने लगा हैं, कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।












