न्यूज डेस्क,खरसिया,छत्तीसगढ़,18जून2026
शिक्षा के क्षेत्र में जनभागीदारी बढ़ाने और नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को,उत्सव के रूप में मनाने के उद्देश्य से आयोजित ब्लॉक स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम खरसिया में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका। स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय के उद्घाटन के साथ आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में व्यवस्थाओं की कमी और कमजोर जनसंपर्क के कारण बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली नजर आईं।
कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही, लेकिन जिन विद्यार्थियों, पालकों और आम नागरिकों के लिए यह आयोजन किया गया था, उनकी भागीदारी बेहद सीमित दिखाई दी। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार विद्यार्थियों और पालकों की संख्या अपेक्षा से काफी कम रही, जिससे आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार और आमंत्रण प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। न तो विद्यालयों के माध्यम से पर्याप्त सूचना पहुंचाई गई और न ही पालकों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रभावी रूप से प्रेरित किया गया। यही कारण रहा कि शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जनसहभागिता देखने को नहीं मिली।
जानकारों का मानना हैं,कि शाला प्रवेशोत्सव जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और पालकों को जागरूक करना होता हैं, लेकिन खरसिया में आयोजित कार्यक्रम अपने मूल उद्देश्य से भटकता नजर आया। कार्यक्रम में ब्लॉक एवं संकुल स्तर के शिक्षकों की उपस्थिति भी अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखी।स्थानीय लोगों का कहना हैं,कि यदि शिक्षा विभाग द्वारा समय रहते बेहतर योजना, व्यापक प्रचार-प्रसार और समन्वय किया जाता तो कार्यक्रम में कहीं अधिक संख्या में विद्यार्थी और पालक शामिल हो सकते थे। कार्यक्रम की तस्वीरों में खाली पड़ी कुर्सियां और सीमित उपस्थिति आयोजन की तैयारियों की वास्तविक स्थिति को बयां कर रही थीं।
क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ हैं,कि जब शासन द्वारा शाला प्रवेशोत्सव को अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा हैं,तब इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जनभागीदारी का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता हैं। स्थानीय नागरिकों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की हैं।हालांकि इस पूरे मामले में खरसिया विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) अथवा शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई हैं।











