न्यूज डेस्क,अंबिकापुर,छत्तीसगढ़,30जून2026
हसदेव अरण्य में कोयला खनन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर,जारी बहस के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। अंबिकापुर में, मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना ही सरकार की नीति हैं। उन्होंने कहा,कि “सड़कें आसमान में नहीं बन सकतीं, विकास कार्यों के लिए कई बार पेड़ काटना जरूरी हो जाता हैं।”मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग यह धारणा बना रहे हैं,कि विकास कार्यों से केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा हैं,जबकि वास्तविकता इससे अलग हैं। उन्होंने बताया,कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भूभाग आज भी वनों से आच्छादित हैं,जो राज्य की प्राकृतिक समृद्धि का प्रमाण हैं।
सीएम साय ने कहा,कि राज्य में वर्षों से कैम्पा (CAMPA) योजना के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चल रहे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के जरिए भी हरियाली बढ़ाने का कार्य लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा,कि इन अभियानों से राज्य में वन क्षेत्र के संरक्षण और विस्तार को मजबूती मिली हैं।मुख्यमंत्री ने उद्योग नीति का उल्लेख करते हुए कहा,कि यदि किसी परियोजना या उद्योग के लिए पेड़ों की कटाई होती हैं,तो संबंधित एजेंसी को निर्धारित नियमों के तहत उससे कहीं अधिक पौधे लगाने होते हैं। उन्होंने कहा,कि सरकार विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा,कि नेशनल हाईवे-43 के चौड़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए कुछ स्थानों पर पेड़ों की कटाई अपरिहार्य हो जाती हैं। “अगर सड़क चौड़ी करनी हैं,तो जमीन पर ही बनेगी, सड़कें आसमान में नहीं बन सकतीं,”। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण को लेकर सवाल उठाने वालों से अपील की कि वे राज्य की उद्योग नीति, पर्यावरणीय नियमों और विकास की आवश्यकताओं का अध्ययन करने के बाद ही टिप्पणी करें। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता देना हैं।












