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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 5 करोड़ की नहर : पहली ही बारिश में खुली पोल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

न्यूज डेस्क,रामानुजगंज,छत्तीसगढ़,30जून2026

शासन की मंशा पर पानी फेरने और सरकारी राशि का, किस कदर दुरुपयोग किया जाता हैं,इसका जीता-जागता उदाहरण रामानुजगंज के भाला गिरवानी नहर परियोजना में देखने को मिल रहा हैं। किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाने के दावे के साथ लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से,बनाई जा रही कंक्रीट नहर पहली ही मूसलाधार बारिश का थपेड़ा भी बर्दाश्त नहीं कर सकी और ताश के पत्तों की तरह ढह गई।मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी हैं,जो अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ हैं।🟠ग्राउंड पर खड़े होकर ग्रामीणों ने खोली पोल: “पहाड़ी पानी के सामने टिकेगा क्या?”

नहर टूटने के बाद जब ग्रामीण और स्थानीय किसान ग्राउंड ज़ीरो पर पहुँचे, तो विभाग और ठेकेदार की लापरवाही साफ उजागर हो गई। मौके से सामने आए वीडियो में स्थानीय लोग साफ तौर पर यह कहते सुने जा रहे हैं,कि:

“पानी ऐसा बरसा कि नहर को ही तोड़ दिया। जब तक यहाँ सही तरीके से पुलिया नहीं दी जाएगी, तब तक पहाड़ी पानी का बहाव नहीं थमेगा और यह प्रोजेक्ट कभी सफल नहीं होगा। कंपनी ने छोटा सा भों लगाकर जैसे-तैसे काम निपटा दिया, जो पहली ही बारिश में टूट गया। अब पहाड़ी पानी के सामने यह छोटा सा भों टिकेगा क्या? कभी नहीं टिकेगा।”

 

🟠शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालता रहा विभाग

स्थानीय किसानों—सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे का आरोप है कि यह हादसा कोई अप्रत्याशित घटना नहीं हैं,बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का नतीजा हैं। निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही ग्रामीणों ने कई बार जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायतें दी थीं।

🟠किसानों का स्पष्ट आरोप हैं,कि:

नहर निर्माण में प्रयुक्त सामग्री (कंक्रीट, सीमेंट, बालू का मिश्रण) मानक के अनुरूप नहीं थी।कंक्रीट की ढलाई के बाद जो तकनीकी रखरखाव और पटाई होनी चाहिए थी,उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।सबसे गंभीर बात यह कि निर्माण के दौरान विभागीय इंजीनियर और ठेकेदार के तकनीकी कर्मचारी मौके से नदारद रहते थे, जिससे ठेकेदार मनमानी करता रहा।

🟠करोड़ों की राशि दांव पर, किसानों में भारी आक्रोश

भाला और विजयनगर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की उम्मीदें इस परियोजना से जुड़ी हुई हैं। लेकिन मानसून की शुरुआत में ही नहर का यह हश्र देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। ग्रामीणों का कहना हैं,कि यदि निर्माणाधीन अवस्था में ही नहर का यह हाल हैं, तो पूरी तरह पानी छोड़े जाने पर यह टिकेगी भी या नहीं, इस पर बड़ा सवालिया निशान लग गया हैं।

🟠शासन-प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग

इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर हैं। प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित शासन और जिला प्रशासन से मांग की हैं,कि:

इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।

निर्माण स्थल पर कंक्रीट और स्ट्रक्चर की गुणवत्ता की लैब टेस्टिंग हो।जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वाले दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर तत्काल सख्त और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।अब देखना यह होगा,कि वीडियो साक्ष्य सामने आने और करोड़ों की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचने के बाद, जिम्मेदार प्रशासन इस पर क्या एक्शन लेता हैं,या फिर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जाता हैं।

रामानुजगंज से नेक्सिस न्यूज़ के लिए ग्राउंड रिपोर्ट।

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