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डॉक्टर्स डे पर ओडिशा में डॉक्टरों की हड़ताल, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ठप हुई ओपीडी सेवाएं

न्यूज डेस्क,राउरकेला,उड़ीसा,1जुलाई 2026

जहां पूरे देश में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (Doctors’ Day) के अवसर पर डॉक्टरों का सम्मान किया गया, वहीं ओडिशा में सरकारी डॉक्टर अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर उतर आए। राज्यभर में शुरू हुए,इस विरोध प्रदर्शन का असर कई सरकारी अस्पतालों में देखने को मिला,जहां ओपीडी सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित रहीं और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा।राज्य के राउरकेला, बोनाई, भुवनेश्वर, कटक सहित कई जिलों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने नियमित सेवाओं से दूरी बनाकर विरोध दर्ज कराया। हालांकि गंभीर मरीजों को राहत देते हुए इमरजेंसी, आईसीयू, ट्रॉमा और अन्य जीवनरक्षक सेवाएं सामान्य रूप से संचालित की गईं।🟠10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन

आंदोलनरत चिकित्सकों का कहना हैं,कि उनकी 10 सूत्रीय मांगें लंबे समय से लंबित हैं,लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। डॉक्टरों ने मांग की हैं,कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए ताकि वे बेहतर माहौल में मरीजों की सेवा कर सकें।

🟠डॉक्टरों की प्रमुख मांगें 

🔸️सेवा शर्तों में सुधार,

🔸️अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना,

🔸️समयबद्ध पदोन्नति,

🔸️रिक्त पदों पर भर्ती,

🔸️आधुनिक चिकित्सकीय संसाधनों की उपलब्धता,

🔸️बेहतर कार्य वातावरण,प्रशासनिक समस्याओं का समाधान जैसी मांगें शामिल हैं।

🟠मरीजों को उठानी पड़ी परेशानी

ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने के कारण दूर-दराज से, इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई अस्पतालों में मरीज घंटों डॉक्टरों के इंतजार में बैठे रहे, जबकि कुछ को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा।

🟠’मरीजों के खिलाफ नहीं, व्यवस्था सुधार के लिए आंदोलन’

डॉक्टरों के संगठन ने स्पष्ट किया,कि उनका आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं हैं। उनका उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाना और चिकित्सकों के लिए सुरक्षित एवं बेहतर कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित कराना हैं।संगठन ने राज्य सरकार से अपील की हैं,कि जल्द वार्ता कर सभी लंबित मांगों का समाधान निकाला जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो सकें।

🟠सरकार से बातचीत की उम्मीद

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार आंदोलनरत डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर गतिरोध समाप्त करने का प्रयास कर सकती हैं। यदि जल्द सहमति नहीं बनती हैं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना भी जताई जा रही हैं।

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