न्यूज डेस्क,सारंगढ़,छत्तीसगढ़,1जुलाई 2026
खरीफ सीजन के बीच किसानों को डीएपी खाद के नाम पर,कथित रूप से नकली उत्पाद बेचकर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में बड़ा खुलासा हुआ हैं। कृषि विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने सरसीवां थाना क्षेत्र के ग्राम गाड़ापाली में कार्रवाई करते हुए,पुलकित बायोफर्टीलाइजर प्रा. लि. से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया हैं। सभी के खिलाफ सरसीवां थाना में एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही हैं।
🟠गांव-गांव घूमकर असली डीएपी बताकर बेचते थे फर्जी खाद
प्रारंभिक जांच में सामने आया हैं,कि आरोपी पिछले दो से तीन वर्षों से सरसीवां क्षेत्र में रहकर सारंगढ़-बिलाईगढ़, जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय थे। आरोप हैं,कि वे किसानों को अपना उत्पाद असली डीएपी खाद बताकर बेचते थे। खरीद के समय किसानों को बाकायदा बिल भी दिया जाता था, लेकिन जांच में पता चला,कि बेचा जा रहा उत्पाद वास्तविक डीएपी नहीं था। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका हैं।
🟠पहचान छिपाने के लिए बार-बार बदलते थे ठिकाना
जांच में यह भी खुलासा हुआ,कि आरोपी सुनसान इलाकों में किराये के कमरों में रहते थे और समय-समय पर अपना ठिकाना बदलते रहते थे, ताकि उनकी गतिविधियों पर किसी को संदेह न हो। इसी वजह से वे लंबे समय तक प्रशासन की नजरों से बचते रहे।
🟠पिछले साल भी मिला था इसी कंपनी का संदिग्ध खाद
कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में भी सरसीवां तहसील के ग्राम भिनोदा में इसी कंपनी का खाद मिला था, लेकिन उस समय आरोपियों तक कार्रवाई नहीं पहुंच सकी थी। इस बार संयुक्त रणनीति और सतर्क निगरानी के चलते टीम ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने में सफलता हासिल की।
🟠कलेक्टर के निर्देश पर हुई संयुक्त कार्रवाई
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के निर्देश पर उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कृष्ण कुमार साहू, उर्वरक निरीक्षक जयप्रकाश गुप्ता, तहसीलदार मोहन साहू, कुलदीप नायक तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की संयुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
🟠किसानों से की गई महत्वपूर्ण अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की हैं,कि वे केवल अधिकृत एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें तथा खरीद का पक्का बिल अवश्य लें। यदि कोई व्यक्ति डीएपी के नाम पर संदिग्ध खाद बेचता मिले तो इसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें, ताकि ऐसे गिरोहों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।











