न्यूज डेस्क,छत्तीसगढ़,28जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ विश्वप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक भोरमदेव धाम पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, मंदिर की परिक्रमा की और प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि तथा जनकल्याण की मंगलकामना की।मुख्यमंत्री इस अवसर पर आयोजित पंच दिवसीय महा चतुर शुद्धि सहस्र कलशम् महाअनुष्ठान में भी शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता करते हुए उन्होंने प्रदेश की उन्नति, सामाजिक सद्भाव और लोकमंगल की प्रार्थना की।
🟠भोरमदेव हमारी संस्कृति और आस्था का गौरवशाली प्रतीक : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री साय ने कहा,कि भोरमदेव धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का गौरवशाली प्रतीक हैं। उन्होंने कहा,कि ऐसे वैदिक महाअनुष्ठान हमारी प्राचीन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सामाजिक समरसता और लोककल्याण की भावना को भी मजबूत करते हैं।
🟠श्रावण मास में कांवड़ यात्रियों पर होगी पुष्पवर्षा
मुख्यमंत्री ने बताया,कि 30 जुलाई से भगवान शिव की आराधना का पावन श्रावण मास प्रारंभ हो रहा हैं। उन्होंने कहा,कि पिछले दो वर्षों की तरह इस वर्ष भी वे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ भोरमदेव धाम पहुंचकर कांवड़ यात्रियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे।उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता की जीवंत परंपरा हैं, जिसका सम्मान करना हम सभी का दायित्व हैं।
🟠वैदिक परंपरा के अनुसार हो रहा महाअनुष्ठान
उल्लेखनीय हैं,कि महादिव्य देशम फाउंडेशन के तत्वावधान में 25 जुलाई से प्रारंभ यह पंच दिवसीय महाअनुष्ठान कबीरधाम सहित पूरे छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक कल्याण की भावना से आयोजित किया जा रहा हैं।फाउंडेशन के प्रमुख राजीव राकुल स्वामी (केरल) के अनुसार यह अनुष्ठान प्राण-प्रतिष्ठित मंदिरों के शुद्धिकरण एवं दिव्य ऊर्जा के पुनर्संचार की प्राचीन वैदिक परंपरा पर आधारित हैं, जिसे भगवान परशुराम स्रोतम और आगम शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया जा रहा हैं।
🟠जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु रहे मौजूद
इस अवसर पर पंडरिया विधायक भावना बोहरा, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, वैदिक आचार्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।











