अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,30जुलाई 2026
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र में,शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में राज्य शासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया हैं। विकासखंड रामचंद्रपुर में विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो समुदाय के विद्यार्थियों के लिए,तीन नए प्री-मैट्रिक छात्रावासों के संचालन को स्वीकृति प्रदान की गई हैं। इस पहल से आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े जनजातीय परिवारों के बच्चों को सुरक्षित आवासीय सुविधा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।यह निर्णय उन विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा हैं,जो दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों से आते हैं और शिक्षा के लिए आवासीय सुविधा की आवश्यकता होती हैं।
🟠तीन नए छात्रावासों में 150 विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्वीकृत छात्रावासों में 1 प्री-मैट्रिक विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो कन्या छात्रावास – रामानुजगंज,1 प्री-मैट्रिक विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो बालक छात्रावास – रामानुजगंज,1 प्री-मैट्रिक विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो बालक छात्रावास – डिंडो शामिल हैं।प्रत्येक छात्रावास में 50-50 सीटों की व्यवस्था की गई हैं। इस प्रकार कुल 150 छात्र-छात्राओं को आवासीय शिक्षा का लाभ मिलेगा।
🟠नियमित भवन बनने तक वैकल्पिक भवनों से होगा संचालन
🔸️नए छात्रावासों के स्थायी भवन तैयार होने तक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शासन ने वैकल्पिक व्यवस्था भी की हैं।
🔸️कन्या छात्रावास का संचालन फिलहाल उड़ान संस्था, रामानुजगंज के भवन से किया जाएगा।
🔸️बालक छात्रावास (रामानुजगंज) का संचालन पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के साथ संयुक्त रूप से होगा।
🔸️बालक छात्रावास (डिंडो) का संचालन प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास डिंडो के भवन से किया जाएगा।
🔸️इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना किसी विलंब के समय पर शुरू कराना हैं।
🟠अधीक्षकों को सौंपी गई जिम्मेदारी
🔸️छात्रावासों के सुचारु संचालन के लिए संबंधित अधीक्षकों की जिम्मेदारी तय की गई हैं।
🔸️कन्या छात्रावास, रामानुजगंज – प्रभारी अधीक्षिका सुषमा भगत (मो. 9399786345)
🔸️बालक छात्रावास, रामानुजगंज – प्रभारी अधीक्षक रामखेलावन जाटवर (मो. 7974536307)
🔸️बालक छात्रावास, डिंडो – अधीक्षक आशीष कुमार (मो. 8319166195)
🟠इच्छुक विद्यार्थी ले सकते हैं प्रवेश
आदिवासी विकास विभाग ने बताया हैं,कि पंडो जनजाति के इच्छुक छात्र-छात्राएं संबंधित छात्रावास के अधीक्षक से संपर्क कर प्रवेश ले सकते हैं। विभाग का प्रयास हैं,कि किसी भी पात्र विद्यार्थी की शिक्षा केवल आवासीय सुविधा के अभाव में प्रभावित न हो।
🟠जनजातीय शिक्षा को मिलेगा नया बल
इन छात्रावासों के शुरू होने से विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को सुरक्षित वातावरण,नियमित अध्ययन, बेहतर शैक्षणिक संसाधन और अनुशासित आवासीय जीवन का लाभ मिलेगा। साथ ही यह पहल जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और ड्रॉपआउट दर कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।











