संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,4सितंबर2026
पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र मांदरी और ढोलक की थाप के साथ ‘रंग तरंग’ कार्यक्रम के तीसरे एवं अंतिम दिवस का शानदार आगाज हुआ। लोक वाद्यों की मनमोहक धुनों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम में कलाकारों ने पारंपरिक ताल और लय के साथ,शानदार लोक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संस्कृति संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि लोक वाद्ययंत्र और पारंपरिक लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। इनके संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हम सभी की हैं।
🟠कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
‘रंग तरंग’ के अंतिम दिवस पर रायपुर के वायलिन वादक डॉ. के. रोहन नायडू, अंबिकापुर के तबला वादक नासिर खान, बालोद के लोक वाद्य कलाकार संजू कुमार सेन और गरियाबंद के श्री प्रेम यादव ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।
कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, संगीत और पारंपरिक वाद्य संस्कृति को मंच मिला। लोक वाद्यों की मधुर धुनों ने जहां संस्कृति प्रेमियों का मन मोहा, वहीं नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश भी दिया।कार्यक्रम में समाजसेवी उदयभान, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने लोक कला और वाद्ययंत्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण पहल बताया।












