भटगांव विधानसभा के 7 धान उपार्जन केंद्र होंगे सुविधा-संपन्न, 69.58 लाख रुपये की मिली स्वीकृति

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,22सितंबर2026

किसानों को धान बेचने के दौरान बेहतर और व्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में,भटगांव विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। भटगांव विधायक एवं कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र के 7 धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण और समतलीकरण कार्य के लिए,कुल 69.58 लाख रुपये की स्वीकृति मिली हैं।इस स्वीकृति के बाद संबंधित धान उपार्जन केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने का काम किया जाएगा। पक्के फड़ और समतलीकरण से धान की आवक,खरीदी और रख-रखाव की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर धान बेचने के दौरान बेहतर बुनियादी सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

🟠7 धान उपार्जन केंद्रों में होंगे निर्माण कार्य

स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां और कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र में 9.94 लाख रुपये की लागत से पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य कराया जाएगा।इन कार्यों से उपार्जन केंद्रों की भौतिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ धान की खरीदी के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद हैं। पक्के फड़ बनने से धान रखने और व्यवस्थित तरीके से उपार्जन प्रक्रिया संचालित करने के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध होगा।

🟠किसानों को मिलेगी व्यवस्थित उपार्जन व्यवस्था

धान उपार्जन केंद्र किसानों के लिए फसल बेचने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में इन केंद्रों पर आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध होने से किसानों को उपार्जन के दौरान अधिक सुविधाजनक वातावरण मिल सकेगा। समतलीकरण के बाद केंद्रों पर आवागमन और धान के रख-रखाव से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए,भटगांव विधानसभा क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को गति देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा हैं। 69.58 लाख रुपये की स्वीकृति से सात धान उपार्जन केंद्रों में सुविधाओं का विस्तार होगा,जिसका लाभ आगामी उपार्जन प्रक्रिया के दौरान किसानों को मिल सकेगा।मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल से स्वीकृत इन कार्यों के जरिए क्षेत्र में धान उपार्जन व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा हैं। इससे उपार्जन केंद्रों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ किसानों के लिए धान बेचने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने में सहायता मिलेगी।

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