संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,23सितंबर2026
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले, उपचारित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पहल तेज कर दी हैं। विभाग ने नगरीय निकायों को एसटीपी के आसपास संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान करने और उनकी जल आवश्यकता का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राज्य के छह नगर निगमों के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर एसटीपी से, 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से समन्वय करने को कहा हैं। निकायों को यह जानकारी जुटानी होगी कि किन संस्थानों को उपचारित पानी की जरूरत हैं,और उन्हें कितनी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी।
🟠6 शहरों में बन रहे 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के तहत,प्रदेश के छह नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माणाधीन हैं।इनमें बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के एसटीपी शामिल हैं।इन प्लांटों से उपचारित जल उपलब्ध होने के बाद उसका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए संभावित उपभोक्ताओं की पहचान पहले से करने की तैयारी की जा रही हैं।
🟠50 किमी की परिधि में तलाशे जाएंगे संभावित उपयोगकर्ता
सूडा के निर्देश के मुताबिक नगरीय निकाय अपने-अपने एसटीपी के आसपास 50 किलोमीटर की परिधि में, संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान करेंगे। इसके लिए थर्मल पावर प्लांट, विभिन्न उद्योगों, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी जल आवश्यकता की जानकारी ली जाएगी।इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना हैं,कि एसटीपी शुरू होने के बाद उपचारित पानी का उपयोग केवल निस्तारण तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरत वाले संस्थानों तक इसे पहुंचाकर इसका दोबारा उपयोग किया जा सके।
🟠15 दिनों में देनी होगी पूरी जानकारी
सूडा ने संबंधित नगर निगम आयुक्तों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी अनुमानित जल आवश्यकता की जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। निकायों को संस्थानों से समन्वय कर आवश्यक जानकारी जुटाने के साथ आगे की कार्यवाही की तैयारी करने को कहा गया हैं।
🟠केंद्र और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप पहल
सूडा के अनुसार यह पहल केंद्र सरकार की ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के उपचारित जल के पुन: उपयोग से संबंधित निर्देशों के अनुरूप की जा रही हैं। टैरिफ पॉलिसी के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश हैं।राज्य सरकार का प्रयास हैं,कि निर्माणाधीन एसटीपी के संचालन के बाद उपचारित जल के लिए संभावित उपयोगकर्ताओं की व्यवस्था पहले से तैयार रहे। इससे जल संसाधनों के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के साथ शहरी क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती हैं।












