बदलते बस्तर की तस्वीर : पर्यटन से विकास की नई राह, गांवों से जुड़ रही नई अर्थव्यवस्था

डेनियल सेप्टी,बस्तर,छत्तीसगढ़,24सितंबर2026

छत्तीसगढ़ का बस्तर अब पर्यटन के जरिए विकास की नई कहानी लिख रहा हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक कला,हस्तशिल्प और स्थानीय आतिथ्य की वजह से बस्तर की पहचान तेजी से पर्यटन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में बन रही हैं। इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलने से पर्यटन का लाभ गांवों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा हैं।

🟠प्रकृति, संस्कृति और परंपरा का संगम

बस्तर की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रकृति और संस्कृति का अनूठा मेल हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर और कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच,अध्यात्म और इतिहास का अलग-अलग अनुभव देते हैं।बस्तर आने वाले पर्यटक केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहते,बल्कि स्थानीय जीवन, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत से भी जुड़ते हैं। इसी वजह से यहां पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित रखने के बजाय,अनुभव आधारित पर्यटन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा हैं।🟠कनेक्टिविटी मजबूत होने से बढ़ेंगी पर्यटन की संभावनाएं

पर्यटन के विस्तार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी हैं। बस्तर में सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर संपर्क देने की दिशा में अहम पहल हैं।जगदलपुर का मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं। वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध हैं। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना के आगे बढ़ने से भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और मजबूत होने की संभावना हैं।बेहतर कनेक्टिविटी का असर केवल पर्यटकों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ग्रामीण उत्पादों को बाजार, स्थानीय व्यवसायों को ग्राहक और युवाओं को पर्यटन से जुड़े रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

🟠होमस्टे से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का फायदा

बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे पर्यटन विकास की अहम कड़ी बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के तहत पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक भोजन, कला और हस्तशिल्प का अनुभव देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।होमस्टे मॉडल की खासियत यह है कि इसका आर्थिक लाभ केवल संचालक परिवार तक सीमित नहीं रहता। पर्यटकों के लिए भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों से आसपास के अन्य परिवारों के लिए भी आय के अवसर बन सकते हैं।नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपये और पहले से बने कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान हैं। एक से नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों के अनुदान प्रस्ताव बैंकों को भेजे जा चुके हैं, जबकि 27 होमस्टे छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड में पंजीकृत हैं।🟠जनजातीय संस्कृति बनी पर्यटन की पहचान

बस्तर की जनजातीय संस्कृति यहां के पर्यटन की सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल हैं। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी-बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक खान-पान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।बस्तर पंडुम 2026 में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और करीब 55 हजार आदिवासी लोगों ने सहभागिता की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में हुए आयोजन ने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच दिया।

🟠आस्था से एडवेंचर तक पर्यटन के कई रंग

बस्तर में धार्मिक, सांस्कृतिक, इको और एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का आधार हैं। वहीं कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति और रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।धुड़मारास में एडवेंचर टूरिज्म, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना बनाई जा रही हैं। इसके अलावा गांव का यूएन टूरिज्म के बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दे रहा हैं।🟠स्थानीय युवाओं को मिल रहा प्रशिक्षण, रोजगार की राह

बस्तर के पर्यटन विकास का एक अहम पहलू स्थानीय लोगों की भागीदारी हैं। होमस्टे संचालक, टूरिस्ट गाइड, ड्राइवर, भोजन सेवा प्रदाता, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और एडवेंचर टूरिज्म से जुड़े युवा इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं।बस्तर के पर्यटन रोडमैप के तहत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया हैं। इससे स्थानीय युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर मिल रहा हैं।

🟠बस्तर की बदलती तस्वीर

बस्तर में पर्यटन विकास की दिशा प्रकृति, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की ओर बढ़ रही हैं। सड़कें और हवाई संपर्क क्षेत्र को जोड़ रहे हैं, होमस्टे गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं,और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान दे रहे हैं।बस्तर की नई तस्वीर अब केवल उसके अतीत से नहीं, बल्कि प्रकृति, शांति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की संभावनाओं से आकार ले रही हैं। यही बदलाव बस्तर को छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक अलग पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता हैं।

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