अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,24सितंबर2026
सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना को साकार करते हुए,बलरामपुर में जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सामूहिक श्रमदान किया गया। वन विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान में जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।श्रमदान की शुरुआत घाघवा नाला में बोरी बंधान निर्माण से हुई। करीब 150 से 200 बोरियों में मिट्टी भरकर नाले में बंधान तैयार किया गया। इसका उद्देश्य वर्षा जल को रोकना और आसपास के क्षेत्र में जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ भू-जल स्तर में सुधार करना हैं।
🟠कलेक्टर-एसपी ने खुद उठाईं बोरियां
बोरी बंधान निर्माण में कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर और वनमंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी ने स्वयं बोरियां उठाकर श्रमदान किया। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी ने आयोजन में जनसेवा और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
🟠सेंदुर नदी तट पर चला स्वच्छता अभियान
घाघवा नाला में श्रमदान के बाद प्रशासनिक दल सेंदुर नदी तट पहुंचा। यहां ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत नदी तट और आसपास के क्षेत्र में सफाई की गई। इसके साथ ही हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया गया।जनपद अध्यक्ष सुमित्रा चेरवा,जिला पंचायत सीईओ आशुतोष चतुर्वेदी, जनप्रतिनिधियों और जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी सफाई एवं पौधारोपण में हिस्सा लिया। इस दौरान लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लिया गया।
🟠‘जल हैं,तो कल हैं’—कलेक्टर
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा,कि जल हैं,तो कल हैं। वर्षा जल को सहेजने में इस तरह के छोटे बंधान उपयोगी साबित होते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास के जलस्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।एसपी वैभव बैंकर ने कहा कि सेवा की भावना समाज को जोड़ती हैं। जब प्रशासन और नागरिक मिलकर श्रमदान करते हैं,तो सकारात्मक बदलाव दिखाई देता हैं।डीएफओ आलोक वाजपेयी ने नदी-नालों के संरक्षण और पौधारोपण को वन एवं पर्यावरण सुरक्षा की बुनियाद बताया। उन्होंने लोगों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़कर पौधा लगाने और उसके संरक्षण की अपील की।
🟠सेवा से जुड़ा सामूहिक संकल्प
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह आयोजन जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ने का संदेश देता हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों-कर्मचारियों के सामूहिक श्रमदान ने यह संदेश दिया,कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर स्थानीय स्तर पर बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।












