संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,27सितंबर2026
कुपोषण से लड़ाई में छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय पहल अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में,छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का उल्लेख किया। इस दौरान स्थानीय स्तर पर आसानी से, उपलब्ध संसाधनों को जनभागीदारी से जोड़कर पोषण की चुनौती से निपटने की पहल की सराहना की गई।
🟠आखिर क्या हैं,‘हर घर मुनगा’ अभियान?
छत्तीसगढ़ में सितंबर महीने को पोषण जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जा रहा हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की थी।अभियान का सीधा उद्देश्य हैं,कि मुनगा यानी सहजन के पौधे ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचें और परिवार इसके पोषण संबंधी फायदे को समझें। सरकार की ओर से इसे सिर्फ पौधा लगाने की मुहिम नहीं, बल्कि पोषण, जागरूकता और जनभागीदारी को जोड़ने वाली पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा हैं।
🟠मुनगा क्यों हैं खास
मुनगा छत्तीसगढ़ में आसानी से उपलब्ध होने वाला पौधा हैं,और इसके पत्ते तथा अन्य हिस्से भोजन में इस्तेमाल किए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।मुनगे के पौधे की एक खास बात यह भी हैं,कि यह तेजी से बढ़ता हैं,और सामान्य तौर पर इसे बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती। यही वजह हैं,कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध इस पौधे को पोषण अभियान से जोड़ने पर जोर दिया गया हैं।महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान देते हुए,आंगनबाड़ी केंद्रों को अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया हैं। यहां परिवारों को पोषण संबंधी जानकारी देने के साथ मुनगे को भोजन में शामिल करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा हैं।
🟠10 लाख से ज्यादा मुनगा पौधों का वितरण
‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के तहत प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और आम लोगों के घरों तक मुनगा के पौधे पहुंचाए जा रहे हैं।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेशभर में 10 लाख 29 हजार 831 मुनगा पौधों का वितरण किया जा चुका हैं। इनमें बस्तर में 25,244, कांकेर में 43,071, दंतेवाड़ा में 7,056, नारायणपुर में 21,224, बीजापुर में 15,699, सुकमा में 4,835 और कोंडागांव में 31,983 पौधे शामिल हैं।सरगुजा में 43,754, कोरिया में 19,022, MCB में 11,939, सूरजपुर में 64,599, बलरामपुर में 27,107 और जशपुर में 1,62,271 पौधे लगाए गए हैं।
🟠रायपुर से लेकर कोरबा तक अभियान की पहुंच
अभियान का विस्तार प्रदेश के मैदानी और अन्य जिलों में भी हुआ हैं। रायपुर में 23,948, महासमुंद में 6,420, धमतरी में 48,833, बलौदाबाजार में 28,398 और गरियाबंद में 10,527 पौधे लगाए गए हैं।दुर्ग में 42,474, राजनांदगांव में 3,480, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 21,991, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 39,222, कबीरधाम में 75,776, बेमेतरा में 19,575 और बालोद में 50,933 पौधे लगाए गए हैं।इसी तरह बिलासपुर में 14,965, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 43,007, जांजगीर-चांपा में 57,653, सक्ती में 6,425, कोरबा में 1,01,002, रायगढ़ में 41,776, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 9,824 और मुंगेली में 6,518 पौधे लगाए गए हैं।
🟠पौधरोपण से आगे, पोषण की आदत बनाने पर जोर
इस अभियान की खास बात यह हैं,कि इसमें किसी महंगे या बाहरी संसाधन के बजाय स्थानीय स्तर पर आसानी से मिलने वाले पौधे को पोषण से जोड़ा गया हैं। घर के आंगन में लगाया गया मुनगा का पौधा आगे चलकर परिवार के भोजन में पोषण का स्थानीय स्रोत बन सकता हैं।सरकार की पहल में आंगनबाड़ी सेवाओं, स्कूलों, परिवारों और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही हैं। इस वजह से ‘हर घर मुनगा’ को केवल पौधरोपण अभियान के बजाय पोषण जागरूकता और स्थानीय भागीदारी से जुड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा हैं।
🟠‘मन की बात’ में उल्लेख से बढ़ी चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में अभियान का उल्लेख किए जाने के बाद इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली हैं। स्थानीय संसाधन और लोगों की भागीदारी के जरिए पोषण से जुड़ी चुनौती पर काम करने का यह मॉडल आगे भी जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बन सकता हैं।अभियान का अगला महत्वपूर्ण पहलू लगाए गए पौधों की देखभाल और उनके उपयोग को लेकर परिवारों में निरंतर जागरूकता बनाए रखना होगा, ताकि पौधरोपण के साथ पोषण संबंधी उद्देश्य भी लंबे समय तक जुड़ा रहे।












