टीबी मुक्त बलरामपुर की ओर बड़ा कदम,‘जोश’ अभियान शुरू, 10 पंचायतों के सरपंचों का सम्मान

अर्पित तिवारी,बलरामपुर,छत्तीसगढ़,8अक्टूबर2026

जिले को टीबी मुक्त बनाने के अभियान को जनभागीदारी से और तेज करने के लिए,बलरामपुर में ‘जोश’ (जॉइंट स्क्वाड फॉर हेल्थ) कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिला कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में, कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी की उपस्थिति में अभियान की शुरुआत हुई। इस दौरान जिले की 10 टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों के सरपंचों को प्रमाण पत्र और महात्मा गांधी की प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का राष्ट्रीय शुभारंभ नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा किया गया। इसका सीधा प्रसारण बलरामपुर में मौजूद अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्यकर्मियों, एनसीसी कैडेटों और अन्य लोगों ने देखा।

🟠गांव-गांव पहुंचेगा ‘जोश’ अभियान

‘जोश’ कार्यक्रम स्वास्थ्य, युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा रक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल हैं। इसके तहत प्रथम श्रेणी के अधिकारी, माई भारत स्वयंसेवक और एनसीसी कैडेट गांव-गांव पहुंचकर लोगों को टीबी की पहचान, जांच, उपचार और पोषण के संबंध में जागरूक करेंगे।अभियान का उद्देश्य केवल टीबी मरीजों की पहचान तक सीमित नहीं हैं,बल्कि बीमारी के लक्षणों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच करवाना और उपचार के दौरान मरीजों को नियमित दवा तथा पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर देना हैं।🟠तीन साल में 20 से 216 पहुंची टीबी मुक्त पंचायतें

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए,कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने टीबी मुक्त पंचायतों के सरपंचों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि बलरामपुर जिले में पिछले तीन वर्षों के, दौरान टीबी मुक्त पंचायतों की संख्या 20 से बढ़कर 216 हो गई हैं।कलेक्टर ने कहा,कि यह उपलब्धि पंचायत प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के सामूहिक प्रयास का परिणाम हैं। उन्होंने कहा,कि अब लक्ष्य केवल कुछ पंचायतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे बलरामपुर जिले को टीबी मुक्त बनाना हैं।उन्होंने संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच, नियमित दवा और पोषण सहायता को अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया। कलेक्टर ने कहा,कि टीबी का इलाज संभव और निःशुल्क हैं। इसलिए बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा का पूरा कोर्स करने की जरूरत हैं।

🟠10 पंचायतों के सरपंच सम्मानित

कार्यक्रम में जिले की 10 टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों के सरपंचों को प्रमाण पत्र और महात्मा गांधी की प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।पहली बार टीबी मुक्त घोषित हुई ग्राम पंचायतों चितविश्रामपुर, नवाडीह, तातापानी, ओबरी, पिण्डरा और अमडण्डा को कांस्य प्रतिमा प्रदान की गई।वहीं लगातार दूसरी बार टीबी मुक्त होने की उपलब्धि हासिल करने वाली सरंगपुर, डूमरखोला, झलरिया और कृष्णनगर ग्राम पंचायतों के सरपंचों को रजत प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।इस दौरान उपचाररत टीबी मरीजों को पोषण सहयोग के रूप में फूड बास्केट भी वितरित किए गए।🟠2025 में 16 हजार से ज्यादा लोगों की हुई जांच

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने जिले में टीबी उन्मूलन की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया,कि वर्ष 2025 में 16,021 संभावित मरीजों की जांच की गई। इनमें से 928 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई। इनमें 845 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि अन्य मरीजों का उपचार जारी हैं।जिले में टीबी मुक्त घोषित पंचायतों की संख्या वर्ष 2023 में 20, वर्ष 2024 में 147 और वर्ष 2025 में बढ़कर 216 हो गई।वर्ष 2025 में टीबी मुक्त घोषित 216 पंचायतों में 131 पंचायतों ने पहली बार, 76 पंचायतों ने दूसरी बार और 9 पंचायतों ने लगातार तीसरी बार यह उपलब्धि हासिल की।

🟠शंकरगढ़ को टीबी मुक्त बनाने की प्रक्रिया जारी

जिले में टीबी उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ते हुए,वर्ष 2026 में शंकरगढ़ विकासखंड को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने की प्रक्रिया भी जारी हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और मैदानी अमले द्वारा संभावित मरीजों की पहचान, जांच और उपचार को लेकर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों, एनसीसी कैडेटों और मितानिनों से अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए इसे जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।🟠‘वी कैन, वी विल’ के साथ लिया टीबी मुक्त बलरामपुर का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान ‘वी कैन, वी विल’ के संदेश के साथ जिले को टीबी मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया। कलेक्टर ने उपस्थित लोगों को टीबी मुक्त बलरामपुर की शपथ भी दिलाई।कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष सुमित्रा चेरवा, उपाध्यक्ष बबली देवी संबल, गणमान्य नागरिक सुषमा मिंज, जय प्रकाश संबल और जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री स्मृति एक्का उपस्थित रहीं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट और मितानिनें भी मौजूद रहीं।

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