वनोपज से बदलेगी आदिवासी परिवारों की आजीविका,छत्तीसगढ़ के वन धन मॉडल को नीति आयोग ने बताया अनुकरणीय

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,8अक्टूबर2026

छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज के माध्यम से जनजातीय समुदायों की आजीविका मजबूत करने और महिलाओं को, आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों को नीति आयोग ने सराहा हैं। नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) के दल ने राज्य का, अध्ययन भ्रमण कर वन धन विकास केन्द्रों की कार्यप्रणाली और लघु वनोपज आधारित आजीविका मॉडल का अध्ययन किया। दल ने विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूहों को वनोपज के संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ने की पहल को अन्य राज्यों के लिए उपयोगी और अनुकरणीय बताया।

🟠संग्रहण से बाजार तक तैयार हो रहा आजीविका का मॉडल

छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के लिए लघु वनोपज लंबे समय से आय और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार रहा हैं। वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से अब केवल वनोपज संग्रहण तक सीमित रहने के बजाय उससे जुड़े प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन और विपणन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा हैं।इस व्यवस्था में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा हैं। इससे महिलाओं को स्थानीय संसाधनों से जुड़े आर्थिक कार्यों में भागीदारी का अवसर मिल रहा हैं, और समूह स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाएं विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा हैं।

🟠नीति आयोग के दल ने समझी वन धन केन्द्रों की कार्यप्रणाली

नीति आयोग की महानिदेशक निधि छिब्बर के नेतृत्व में, आए दल ने छत्तीसगढ़ में संचालित आजीविका गतिविधियों और वन धन विकास केन्द्रों के मॉडल का अध्ययन किया।छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक संजीता गुप्ता ने दल को राज्य में चल रही विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन और पीएम-जनमन के अंतर्गत वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से महिला समूहों को उपलब्ध कराए जा रहे आजीविका अवसरों और विभिन्न चरणों में किए जा रहे कार्यों पर प्रस्तुतीकरण दिया।प्रस्तुतीकरण में वनोपज के संग्रहण से लेकर उसके प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण, मूल्य संवर्धन और विपणन तक की व्यवस्था की जानकारी दी गई।🟠महिला समूहों को मिल रहा आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर

नीति आयोग की महानिदेशक निधि छिब्बर ने राज्य शासन और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा,कि महिला समूहों को अलग-अलग चरणों में निरंतर सहयोग उपलब्ध कराने से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।वनोपज आधारित गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। संग्रहण के बाद वनोपज को सीधे बेचने के बजाय उसका मूल्य संवर्धन कर उत्पाद तैयार करने से समूहों को पूरी प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलता हैं।

🟠अन्य योजनाओं से जुड़े समूहों को जोड़ने का सुझाव

अध्ययन भ्रमण के दौरान नीति आयोग की महानिदेशक ने वन धन विकास केन्द्रों के दायरे को और व्यापक बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े महिला समूहों को भी वन धन विकास केन्द्रों से जोड़ा जा सकता हैं।इसके साथ ही भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से समूहों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल करने का सुझाव दिया गया। इससे महिला समूहों की आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने और उन्हें अधिक संगठित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती हैं।

🟠लघु वनोपज से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर जोर

छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में जनजातीय परिवार वन क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध लघु वनोपज को आजीविका से जोड़ना ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से संग्रहण के साथ-साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर, जोर दिए जाने से स्थानीय संसाधनों से तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ती हैं। महिला स्व-सहायता समूहों को इस प्रक्रिया में जोड़ने से आर्थिक भागीदारी के साथ महिलाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता हैं।

🟠वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में चल रही पहल

राज्य में लघु वनोपज आधारित आजीविका गतिविधियों को वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बढ़ावा दिया जा रहा हैं। वन विभाग और लघु वनोपज संघ के स्तर पर संचालित गतिविधियों के जरिए जनजातीय समुदायों को स्थानीय संसाधनों से जोड़कर आजीविका के अवसर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा हैं।नीति आयोग के अध्ययन दल की सराहना और सुझावों से वन धन विकास केन्द्रों के मॉडल को आगे विस्तार देने तथा अन्य समूहों को इससे जोड़ने की दिशा में संभावनाएं बनती हैं। बैठक में राज्य नीति आयोग और ट्राइफेड के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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