संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,14अक्टूबर2026
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को अब डिजिटल माध्यमों के जरिए देश-विदेश तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा हैं। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रमेन डेका ने कहा,कि प्रदेश की पहचान बनी पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए। इससे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिलने के साथ नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।राज्यपाल रमेन डेका बुधवार को खैरागढ़ स्थित राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के,70वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय की सात दशकों की यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया।
🟠डिजिटल प्लेटफॉर्म से लोककलाओं को मिलेगी नई पहचान
राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की लोककलाओं और जनजातीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा,कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध हैं। इसे केवल स्थानीय आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय डिजिटल माध्यमों से व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की आवश्यकता हैं।आज मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों से कला और संस्कृति को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जा सकता हैं। लोककलाओं की प्रस्तुतियों, कलाकारों के अनुभवों और पारंपरिक कला शैलियों को डिजिटल रूप में संरक्षित और साझा करने से नई पीढ़ी के बीच इनके प्रति रुचि बढ़ सकती हैं।पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
🟠संगीत और कला मनुष्य के जीवन को बनाते हैं समृद्ध
राज्यपाल ने कहा,कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता हैं, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक अनुभवों को अभिव्यक्त करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कला के क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए धैर्य, निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण भी जरूरी हैं। कलाकार को अपनी कला को बेहतर बनाने के लिए लगातार सीखते रहना चाहिए और अपनी मौलिकता बनाए रखनी चाहिए।राज्यपाल ने कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उनके संदेश का प्रमुख उद्देश्य यह रहा,कि विद्यार्थी अपनी रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करने के साथ कला के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी तलाशें।
🟠70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को किया याद
राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस पर राज्यपाल ने संस्थान की लंबी यात्रा और उससे जुड़े लोगों के योगदान को याद किया।उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना में दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया। दोनों ने अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए योगदान दिया था।राज्यपाल ने कहा कि किसी शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थान की प्रगति के पीछे अनेक पीढ़ियों का समर्पण और सामूहिक प्रयास होता हैं। विश्वविद्यालय की सात दशक लंबी यात्रा इसी योगदान का उदाहरण हैं।स्थापना दिवस समारोह विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक और शैक्षणिक परंपरा को याद करने के साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए कला के क्षेत्र में नई संभावनाओं पर विचार करने का अवसर भी बना।
🟠सांसद संतोष पांडे ने राजपरिवार के योगदान को बताया अनुकरणीय
समारोह में सांसद संतोष पांडे ने राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा,कि अपनी पुत्री की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिया गया दान अद्वितीय और अनुकरणीय हैं।सांसद ने कहा कि वर्तमान समय में जमीन दान करना भी आसान नहीं हैं,लेकिन राजपरिवार की दूरदर्शी सोच ने खैरागढ़ को कला और संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा, कला-कौशल और परिश्रम के महत्व को समझने का संदेश दिया। साथ ही राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करने और अपने कार्यों के माध्यम से समाज के विकास में योगदान देने पर जोर दिया।
🟠कुलपति ने किया अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने समारोह में शामिल अतिथियों का स्वागत किया।इस अवसर पर राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह ने कला, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित किया। राज्यपाल का संदेश स्पष्ट रहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को संरक्षित करने के साथ आधुनिक डिजिटल माध्यमों से नई पहचान दिलाना भी जरूरी हैं। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने और कलाकारों के लिए नए अवसर विकसित करने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।












