पायल खेमका, अंबिकापुर/छत्तीसगढ़,16अगस्त2025 | विशेष रिपोर्ट — Nexis News
भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता व कवि संतोष सरल ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने अपनी कविताओं में अटल जी के व्यक्तित्व, राष्ट्रभक्ति और आदर्शों को अमर शब्दों में पिरोते हुए कहा
काव्यांजलि – “मैं अलबेला अटल हूँ”
“मैं अलबेला अटल हूँ,
गीत गाता कंवल हूँ।
मां भारती को प्यारा,
मुस्कुराता कमल हूँ।”
1.
धमनियों में राष्ट्रवाद संग, हिन्दुत्व का रक्त संचारित।
भुजाओं में बसंती ऊर्जा, देशभक्ति निरंतर प्रवाहित।
मेरी अंतरात्मा है भारत, मैं भारती धवल हूँ।
मैं अलबेला अटल हूँ।
2.
कवि हृदय है कोमल मन, उत्कृष्ट विचार सौम्य जीवन।
है संपूर्ण राष्ट्र को समर्पित, तन, मन, धन, ज्ञान, यौवन।
मातृभूमि का सेवक मात्र, व्यक्तित्व का सरल हूँ।
मैं अलबेला अटल हूँ।
3.
विश्व गुरु भारत वर्ष हो, यही संकल्प अंतिम लक्ष्य है।
सद्भावना, बंधुत्व, प्रेम हो, यही संघे संगठन का मंत्र है।
निकल पड़ा हूँ प्रण लिए, भावना मैं निश्छल हूँ।
मैं अलबेला अटल हूँ।
4.
सत्ता शिखर पर रहकर भी, कभी राजधर्म नहीं छोड़ा।
अंतिम व्यक्ति की चिंता की, कभी सेवाकर्म नहीं छोड़ा।
श्रमिक, किसानों का संबल, जन-जन का आत्मबल हूँ।
मैं अलबेला अटल हूँ।
5.
परमाणु विस्फोट किया जब, दुनिया ने प्रतिबंध लगाया।
तब स्वाभिमान व राष्ट्रभक्ति से, भारत का सामर्थ्य दिखलाया।
अभिमान हूँ मेरे हिन्द का, इच्छा शक्ति प्रबल हूँ।
मैं अलबेला अटल हूँ।
6.
कारगिल युद्ध में हिन्द के, सेना ने विजय दिलाई थी।
मेजर बत्रा और वीरों ने, पाक को सबक सिखाई थी।
रणभूमि में सैन्य का बल, नेतृत्व सशक्त सफल हूँ।
मैं अलबेला अटल हूँ।
7.
कर राजनीति मूल्यों की, समझौता कभी किया नहीं।
एक वोट से हार गए पर, जीत का सौदा किया नहीं।
अजातशत्रु छवि स्वच्छ, छांव कोई शीतल हूँ।
मैं अलबेला अटल हूँ।
अंत में संतोष सरल ने दोहराया –
“मां भारती को प्यारा, मुस्कुराता कमल हूँ।
मैं अलबेला अटल हूँ… मैं अलबेला अटल हूँ।”
#AtalBihariVajpayee
#अटलजी #Atalji
#Punyatithi
#कवि_संतोष_सरल
#मैं_अलबेला_अटल_हूँ
#BJPLeaders
#AtalThoughts
#Rashtrabhakti
#AtalForever
#BharatRatna












